कनाडा में वीज़ा नियम सख्त—हजारों पंजाबी युवाओं पर मंडराया वापसी का खतरा

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पंजाब , 18 अप्रैल 2026 । कनाडा में पढ़ाई और काम के लिए गए हजारों पंजाबी युवाओं के सामने अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। हाल ही में कनाडाई इमिग्रेशन विभाग Immigration, Refugees and Citizenship Canada द्वारा जारी एक नोटिस ने उन छात्रों और वर्क परमिट धारकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिनके दस्तावेजों या प्रवेश प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता पाई गई है। इस नोटिस के बाद बड़ी संख्या में भारतीय, खासकर पंजाब से गए युवाओं के भारत लौटने की आशंका जताई जा रही है।

इस फैसले के विरोध में पंजाबी स्टूडेंट्स समेत कई देशों के छात्रों ने विनिपेग में प्रदर्शन कर सरकार से राहत की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अचानक नियम बदलने से हजारों युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ गया है। अगर आवेदन करने में देरी होती है तो उसी शरणार्थी को कानून के तहत राहत मिलेगी जिसके पास कोई ठोस वजह होगी और प्रूफ करना होगा। अगर प्रूफ न दे पाए तो उसके पास 90 दिन का समय होगा जिसके अनुसार वह किसी वकील के जरिए कानूनी मदद ले सकते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई मामलों में फर्जी ऑफर लेटर, संदिग्ध एडमिशन या एजेंटों के जरिए दाखिला लेने के आरोप सामने आए हैं। जांच के दौरान यदि दस्तावेज अवैध या भ्रामक पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों का वीज़ा रद्द किया जा सकता है और उन्हें देश छोड़ने के निर्देश दिए जा सकते हैं। इससे उन युवाओं पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है, जिन्होंने भारी कर्ज लेकर विदेश में पढ़ाई का सपना पूरा करने की कोशिश की थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई कनाडा की सख्त इमिग्रेशन नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सिस्टम में पारदर्शिता और वैधता बनाए रखना है। हालांकि, कई छात्रों का दावा है कि वे एजेंटों के झांसे में आ गए और उन्हें दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं थी। ऐसे में निर्दोष छात्रों के भविष्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।

भारत सरकार और कनाडा में भारतीय उच्चायोग से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग उठ रही है, ताकि प्रभावित छात्रों को उचित कानूनी सहायता और समाधान मिल सके। इस मुद्दे ने पंजाब में भी राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है, जहां से बड़ी संख्या में युवा विदेश जाते हैं।

यह स्थिति न केवल छात्रों के लिए चेतावनी है, बल्कि उन अभिभावकों और युवाओं के लिए भी एक सबक है जो बिना पूरी जांच-पड़ताल के एजेंटों पर भरोसा कर लेते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कनाडा सरकार इस मामले में कितनी सख्ती बरतती है और क्या प्रभावित छात्रों को कोई राहत मिल पाती है।

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