पटना , 03 अप्रैल 2026 । बिहार का पारंपरिक और पौष्टिक उत्पाद मखाना अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रहा है। Purnia से Dubai के लिए मखाने की पहली ऐतिहासिक खेप भेजी गई है, जो राज्य के कृषि और निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे न केवल बिहार के किसानों को नया बाजार मिलेगा, बल्कि देश के इस ‘सुपरफूड’ की वैश्विक मांग भी तेजी से बढ़ेगी।
इस दौरान पहली बार जीआई-टैग प्राप्त मिथिला मखाना को समुद्री मार्ग से पूर्णिया जिले से दुबई (संयुक्त अरब अमीरात) भेजा गया। दो मीट्रिक टन की यह ऐतिहासिक खेप 21 जनवरी 2026 को रवाना की गई थी। यह निर्यात वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (भारत सरकार), बिहार सरकार और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), पटना के सहयोग से संपन्न हुआ था। समुद्री मार्ग से हुए इस सफल निर्यात ने साबित किया कि बिहार अब अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स में सक्षम हो चुका है। इससे किसानों, किसान उत्पादक संगठनों और उद्यमियों को नए बाजार मिलने की शुरुआत हो चुकी है।
मखाना, जिसे फॉक्स नट (Fox Nut) या गोरखमुण्डी बीज के नाम से भी जाना जाता है, अपनी उच्च पोषण क्षमता के कारण दुनियाभर में लोकप्रिय हो रहा है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे यह हेल्थ-कॉन्शियस लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। खासतौर पर Bihar के मिथिलांचल क्षेत्र में इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है।
इस निर्यात की शुरुआत से स्थानीय किसानों और व्यापारियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। अब तक मखाना मुख्य रूप से घरेलू बाजार तक सीमित था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग बढ़ने से किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी और उनकी आय में वृद्धि होगी। इसके साथ ही, कृषि आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
सरकार और कृषि संगठनों द्वारा मखाने को ब्रांडिंग और प्रोसेसिंग के जरिए वैश्विक स्तर पर प्रमोट किया जा रहा है। आधुनिक पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और सप्लाई चेन सुधार के कारण यह उत्पाद अब विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह निर्यात बढ़ता रहा, तो मखाना आने वाले समय में भारत का एक प्रमुख एग्री-एक्सपोर्ट प्रोडक्ट बन सकता है। इससे Bihar की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और राज्य के किसानों की स्थिति में भी सुधार होगा।
कुल मिलाकर, Purnia से Dubai तक पहुंची यह पहली खेप न केवल एक व्यापारिक उपलब्धि है, बल्कि यह बिहार के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी है।