नई दिल्ली , 26 मार्च 2026 । राजधानी Delhi से जुड़े दंगा मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा आरोपियों को बरी करने के आदेश को बरकरार रखा है। साथ ही, Delhi Police की ओर से दायर अपील को भी खारिज कर दिया गया है, जिससे आरोपियों को बड़ी राहत मिली है।
कड़कड़डूमा कोर्ट की एक सत्र अदालत ने बुधवार को दिल्ली पुलिस की उस पुर्निविचार याचिका को खारिज कर दियाए जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों के एक मामले में दो आरोपियों को बरी करने वाली निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी।
एडिशनल सेशन जज समीर बाजपेयी ने अजय और गौरव पांचाल को आरोपमुक्त करने वाले फैसले को बरकरार रखा। ट्रायल कोर्ट के नतीजों को बिल्कुल सही मानते हुए सेशन कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने के लिए जिस “गंभीर संदेह” की ज़रूरत होती है, वह आरोपियों पर नहीं, बल्कि “पुलिस की कहानी” पर उठ रहा है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। जांच में कई महत्वपूर्ण कड़ियों का अभाव पाया गया, जिसके चलते अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस मामला स्थापित नहीं कर सका। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
इस फैसले के बाद कानूनी और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ विशेषज्ञ इसे न्यायिक प्रक्रिया की मजबूती का उदाहरण मान रहे हैं, जहां साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय लिया गया। वहीं, दूसरी ओर इस मामले में जांच की गुणवत्ता और सबूत जुटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।
पीड़ित पक्ष और पुलिस के लिए यह झटका माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से चल रहे इस मामले में उन्हें राहत की उम्मीद थी। अब इस फैसले के बाद आगे की कानूनी विकल्पों—जैसे उच्चतम न्यायालय में अपील—पर विचार किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में जांच एजेंसियों को और अधिक सटीकता और पेशेवर तरीके से काम करने की जरूरत है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में मजबूत साक्ष्य पेश किए जा सकें और दोषियों को सजा दिलाई जा सके।