‘एस सर’ कोडवर्ड से चलता था रिश्वत का खेल! IAS संजीव हंस पर नेटवर्क के जरिए भ्रष्टाचार के आरोप

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पटना, 26 मार्च 2026 । बिहार में एक हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। Sanjeev Hans पर आरोप है कि वे सीधे रिश्वत लेने से बचते थे, लेकिन इसके लिए उन्होंने एक पूरा नेटवर्क तैयार कर रखा था, जिसके जरिए कथित तौर पर लेन-देन किया जाता था। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क में कई बिचौलिए और सहयोगी शामिल थे, जो अलग-अलग स्तर पर पैसों की वसूली और ट्रांसफर का काम संभालते थे।

पंजाब के मूल निवासी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के बिहार कैडर के अधिकारी संजीव हंस सिर्फ रिश्वतखोरी ही नहीं करते रहे, इसके लिए उन्होंने 9 लोगों का एक पूरा नेटवर्क बना रखा था। ये लोग घूस की रकम वसूलने में बिचौलिये का काम करता था। मामले की जांच में संजीव हंस के संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

अपने खास 9 लोगों का बनाया नेटवर्क

संजीव हंस के एक करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के मामले के अलावा उनके खिलाफ रिश्वतखोरी के लिए एक संगठित नेटवर्क बनाने का मामला भी जुड़ा गया है। बताया जाता है कि संजीव हंस किसी से सीधे रिश्वत लेने के बजाय इसके लिए अपने भरोसे वाले 9 लोगों के नेटवर्क का उपयोग करता था। हंस एक साल जेल में कैद रहने के बाद फिलहाल जमानत पर रिहा है। उस पर जांच एजेंसियों प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी ), एसवीयू और सीबीआई ने केस दर्ज किए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे सिस्टम में ‘एस सर’ एक कोड वर्ड के रूप में इस्तेमाल होता था, जिससे संकेत मिलता था कि पैसा किसके लिए है। इस कोड के जरिए बातचीत को छिपाने और सीधे तौर पर नाम सामने न आने देने की कोशिश की जाती थी। जांच एजेंसियों को ऐसे कई डिजिटल और दस्तावेजी सबूत मिले हैं, जिनसे इस नेटवर्क के अस्तित्व के संकेत मिलते हैं।

बताया जा रहा है कि रिश्वत की रकम सीधे लेने के बजाय तीसरे पक्ष के जरिए इकट्ठा की जाती थी और फिर उसे अलग-अलग माध्यमों से ट्रांसफर किया जाता था। इससे आरोपी पर सीधे आरोप सिद्ध करना मुश्किल हो जाता था। हालांकि, एजेंसियां अब इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर फिर से बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के संगठित भ्रष्टाचार को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी, सख्त कानून और स्वतंत्र जांच एजेंसियों की भूमिका बेहद अहम होती है।

फिलहाल जांच जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं।

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