सैटेलाइट के जरिए अमेरिकी ठिकानों की निगरानी का दावा, चीन पर जासूसी के आरोप

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बीजिंग, 11 मार्च 2026 । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच तनाव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। दावा किया जा रहा है कि चीन ने सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल कर अमेरिकी लोकेशन और रणनीतिक ठिकानों को ट्रैक करने की कोशिश की। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद वैश्विक सुरक्षा और अंतरिक्ष तकनीक को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

28 फरवरी को ईरान पर पहली मिसाइल चलने से पहले ही चीनी सोशल मीडिया पर संकेत मिलने लगे थे कि अमेरिका बड़ा हमला करने की तैयारी कर रहा है। इंटरनेट पर अमेरिकी सैन्य तैयारियों से जुड़ी सैटेलाइट तस्वीरें तेजी से फैलने लगी थीं।

इन तस्वीरों में रनवे पर खड़े लड़ाकू विमान, रेगिस्तानी एयरफील्ड पर उतरते ट्रांसपोर्ट प्लेन और भूमध्यसागर में किसी विमानवाहक पोत के डेक पर तैनात फाइटर जेट दिखाई दे रहे थे। इन तस्वीरों की खास बात यह थी कि इनमें असामान्य रूप से बहुत ज्यादा जानकारी दी गई थी और यह जानकारी अंग्रेजी में नहीं बल्कि मंदारिन (चीनी भाषा) में लिखी हुई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तस्वीरों में अलग-अलग विमानों के नाम बताए गए थे, मिसाइल रक्षा सिस्टम को साफतौर पर चिह्नित किया गया था और सैनिकों की तैनाती को सटीक लोकेशन के साथ दिखाया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी सैटेलाइट्स ने पृथ्वी की कक्षा से अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और महत्वपूर्ण ठिकानों पर नजर रखने की कोशिश की। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक सैटेलाइट तकनीक इतनी उन्नत हो चुकी है कि इसके जरिए किसी देश की सैन्य गतिविधियों, जहाजों की आवाजाही और अन्य रणनीतिक सूचनाओं को काफी हद तक ट्रैक किया जा सकता है।

हालांकि इस तरह की जासूसी के आरोपों को लेकर दोनों देशों के बीच पहले भी विवाद हो चुका है। अमेरिका पहले भी चीन पर साइबर जासूसी और निगरानी गतिविधियों के आरोप लगाता रहा है, जबकि चीन अक्सर इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स का उपयोग केवल संचार और मौसम संबंधी जानकारी के लिए ही नहीं होता, बल्कि कई देश इन्हें रणनीतिक और सुरक्षा उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। इसी वजह से अंतरिक्ष तकनीक आज वैश्विक शक्ति संतुलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अंतरिक्ष में बढ़ती प्रतिस्पर्धा भविष्य में देशों के बीच तनाव को किस हद तक प्रभावित कर सकती है। कई विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में अंतरिक्ष आधारित तकनीक और सैटेलाइट सिस्टम अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा रणनीति में और ज्यादा अहम भूमिका निभाने वाले हैं।

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