हरियाणा की छात्राओं को मिलेंगे 11 लाख से ज्यादा सैनिटरी पैड,

9वीं से 12वीं तक की लड़कियों को स्कूलों में मिलेगी मुफ्त सुविधा

0

करनाल,03 नवंबर 2026 |  हरियाणा सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं के स्वास्थ्य और व्यक्तिगत स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक की छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएंगे। विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने दिसंबर 2026 तक की जरूरत के लिए कुल 11 लाख 4 हजार 813 पैकेट की सप्लाई का आदेश जारी किया है। खास बात यह है कि पैड की आपूर्ति सीधे स्कूलों तक की जाएगी, ताकि छात्राओं को आसानी से यह सुविधा मिल सके।

प्रत्येक पैकेट में होंगे 10 सैनिटरी पैड

शिक्षा निदेशालय के आदेश के अनुसार, प्रत्येक पैकेट में 10 सैनिटरी पैड होंगे। ये विंग्स टाइप नैपकिन होंगे। एक पैकेट की कीमत सभी टैक्स और जीएसटी सहित 20.50 रुपये निर्धारित की गई है। सरकार ने इस काम के लिए दो कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी है।

  • एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड: 8,14,308 पैकेट की आपूर्ति करेगी।
  • नुवो मेडसर्ज प्राइवेट लिमिटेड: 2,90,505 पैकेट उपलब्ध कराएगी।

दोनों कंपनियों को कुल 11,04,813 पैकेट स्कूलों तक पहुंचाने हैं।

गुरुग्राम में सबसे ज्यादा सैनिटरी पैड की मांग

शिक्षा निदेशालय ने छात्राओं की संख्या और स्कूलों की जरूरत के आधार पर जिलावार पैकेट की संख्या तय की है। गुरुग्राम में सबसे ज्यादा 83,286 पैकेट की मांग है। इसके अलावा सिरसा, फरीदाबाद और जींद में भी बड़ी संख्या में पैड उपलब्ध कराए जाएंगे।

नुवो मेडसर्ज कंपनी करनाल, कैथल, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, अंबाला और पंचकूला में सप्लाई करेगी। वहीं, बाकी जिलों में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड पैकेट पहुंचाएगी।

स्कूलों में होगी सीधी डिलीवरी, DEO करेंगे जांच

इस व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार ने स्कूल स्तर पर डिलीवरी अनिवार्य की है। कंपनियों को संबंधित स्कूलों में सैनिटरी पैड पहुंचाने होंगे। इसके बाद भुगतान से पहले डिलीवरी चालान का सत्यापन संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) करेंगे।

इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि सरकारी आदेश के मुताबिक पैड वास्तव में स्कूलों तक पहुंचे हैं और छात्राओं को उनका लाभ मिल रहा है।

छात्राओं की पढ़ाई और स्वास्थ्य को मिलेगा फायदा

सरकार की इस पहल का उद्देश्य किशोरियों को मासिक धर्म के दौरान जरूरी स्वच्छता सामग्री उपलब्ध कराना है। विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राओं को इससे राहत मिल सकती है। स्कूलों में मुफ्त सैनिटरी पैड मिलने से मासिक धर्म के कारण पढ़ाई प्रभावित होने की समस्या कम करने और छात्राओं की नियमित उपस्थिति बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.