लखनऊ में मृत इंजीनियर की सरकारी नौकरी हासिल करने की साजिश का खुलासा
लखनऊ,03 नवंबर 2026 | उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मृत इंजीनियर की नौकरी हासिल करने से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि मृत इंजीनियर की जगह नौकरी पाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया। जांच के दौरान एक ही मोबाइल नंबर पर दो अलग-अलग विवाह प्रमाणपत्र मिलने से मामले में नया मोड़ आ गया है। इस खुलासे के बाद दस्तावेजों की सत्यता और पूरे मामले में शामिल लोगों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
सिंचाई विभाग के मृत अधिशासी अभियंता की पत्नी बनकर उनकी नौकरी पाने की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक महिला ने खुद को इंजीनियर की पत्नी साबित करने के लिए फर्जी विवाह प्रमाणपत्र बनवाया और उसे विभाग में भी जमा करा दिया। पीड़ित पत्नी की शिकायत पर चिनहट पुलिस ने पांच नामजद समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
हैवलक रोड स्थित सरकारी आवास में रहने वाली संतोषी रावत ने पुलिस को बताया कि उनके पति सुशील कुमार सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता थे। 27 अप्रैल 2025 को सड़क हादसे में उनकी मृत्यु हो गई थी। उनके चार बच्चे हैं। आरोप है कि पति की मृत्यु के बाद लक्ष्मी नाम की महिला ने कुछ लोगों के साथ मिलकर खुद को उनकी पत्नी बताने की साजिश रची।
शिकायत के मुताबिक, लक्ष्मी ने चंद्रिका प्रसाद, पिंकू और अन्य लोगों की मदद से 30 जुलाई 2020 को विवाह प्रमाणपत्र बनवाया। इसमें उसे सुशील कुमार की पत्नी बताया गया। इस प्रमाणपत्र को सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय में भी जमा कराया गया, ताकि नौकरी और अन्य सरकारी लाभ हासिल किए जा सकें।
संतोषी ने जब प्रमाणपत्र की जांच कराई तो आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश के कार्यालय में इसे फर्जी बताया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इसी प्रमाणपत्र नंबर पर तीन अगस्त 2024 को अननुराधा यादव नाम की दूसरी महिला का विवाह प्रमाणपत्र भी जारी हुआ था।
चिनहट पुलिस ने लक्ष्मी, चंद्रिका प्रसाद, पिंकू, आशीष कुमार त्रिपाठी और नितेश देशवाल समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी कर लाभ हासिल करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है।
एक मोबाइल नंबर पर मिले दो विवाह प्रमाणपत्र
जांच के दौरान एक ही मोबाइल नंबर से जुड़े दो विवाह प्रमाणपत्र सामने आना इस मामले का अहम पहलू बन गया है। सामान्य तौर पर विवाह प्रमाणपत्र अलग-अलग व्यक्तियों की वैवाहिक जानकारी से संबंधित होते हैं। ऐसे में एक ही नंबर पर दो प्रमाणपत्र मिलने से दस्तावेजों के इस्तेमाल और उनकी प्रामाणिकता की जांच जरूरी हो गई है।
दस्तावेजों की जांच से खुल सकते हैं कई राज
इस मामले में संबंधित दस्तावेजों, आवेदन प्रक्रिया और रिकॉर्ड का मिलान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच में यह पता लगाया जा सकता है कि प्रमाणपत्र कब जारी हुए, आवेदन किसने किया और उनमें दर्ज जानकारियां सही हैं या नहीं। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि मृत इंजीनियर की नौकरी से जुड़े रिकॉर्ड तक किसी ने गलत तरीके से पहुंच बनाने की कोशिश तो नहीं की।
जांच के दायरे में पूरा मामला
मामले की तह तक पहुंचने के लिए दस्तावेजों और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल जरूरी है। यदि फर्जी प्रमाणपत्र या गलत जानकारी के आधार पर नौकरी हासिल करने की कोशिश साबित होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
लखनऊ का यह मामला सरकारी नौकरी में दस्तावेजों के सत्यापन और रिकॉर्ड की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े करता है। फिलहाल जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मृत इंजीनियर की नौकरी हासिल करने की कथित साजिश में कौन-कौन शामिल था और दो विवाह प्रमाणपत्र एक ही मोबाइल नंबर से कैसे जुड़े।