बांग्लादेश में भारत के ट्रांजिट कॉरिडोर का विरोध, विपक्षी नेता ने दी सड़क पर उतरने की चेतावनी

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ढाका, 31 अक्टूबर 2026 | भारत और बांग्लादेश के बीच क्षेत्रीय संपर्क और रणनीतिक सहयोग को लेकर नया विवाद सामने आया है। बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के संयोजक नाहिद इस्लाम ने अपने देश के रास्ते भारत के लिए ट्रांजिट कॉरिडोर बनाने की किसी भी पहल का विरोध किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार पर भारत को ऐसा कॉरिडोर उपलब्ध कराने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

31 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, नाहिद इस्लाम ने शुक्रवार को ढाका में आयोजित एक रैली में यह बयान दिया। उन्होंने भारत के साथ गंगा जल बंटवारे की संधि को भी मुद्दा बनाया और दिसंबर में इसकी अवधि समाप्त होने से पहले बांग्लादेश के हितों की रक्षा करने वाली नई व्यवस्था की मांग की।

विपक्षी नेता नाहिद इस्लाम ने शुक्रवार को ढाका में एक रैली के दौरान आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार बांग्लादेश में भारत को ट्रांजिट कॉरिडोर देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की जमीन भारत को नहीं दी जाएगी।

ट्रांजिट कॉरिडोर का मतलब एक देश की जमीन और सड़क का इस्तेमाल करके दूसरे देश के किसी हिस्से तक सामान पहुंचाना है। इससे दूरी और सामान पहुंचाने में लगने वाला समय कम हो सकता है।

नाहिद ने गंगा जल समझौते को लेकर भी सरकार से सख्त रुख अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि अगर समझौते को नए सिरे से करते समय बांग्लादेश के हितों का ध्यान नहीं रखा गया, तो लोग इसके विरोध में सड़कों पर उतरेंगे।

नाहिद इस्लाम ने ट्रांजिट कॉरिडोर का किया विरोध

नाहिद इस्लाम ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार बांग्लादेश के रास्ते भारत को ट्रांजिट कॉरिडोर देने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की जनता ऐसे किसी समझौते को स्वीकार नहीं करेगी, जिसे वह देश के हितों के खिलाफ मानती है।

उन्होंने इस मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी भी दी। नाहिद इस्लाम की पार्टी NCP का गठन फरवरी 2025 में हुआ था। इसमें 2024 के छात्र आंदोलन से जुड़े कई नेता शामिल हैं। उस आंदोलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शनों में अहम भूमिका निभाई थी।

गंगा जल समझौते को लेकर भी बढ़ा दबाव

भारत के साथ ट्रांजिट कॉरिडोर का विरोध करने के साथ नाहिद इस्लाम ने गंगा जल बंटवारे का मुद्दा भी उठाया। वर्ष 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई गंगा जल संधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाली है।

इस समझौते के तहत पश्चिम बंगाल के फरक्का बैराज पर जनवरी से मई के बीच कम पानी के मौसम में गंगा नदी के जल का बंटवारा किया जाता है। बांग्लादेश लंबे समय से इस समझौते के नवीनीकरण और अपने हिस्से के पानी की सुरक्षा के लिए मजबूत प्रावधानों की मांग करता रहा है।

नाहिद इस्लाम ने चेतावनी दी कि यदि समझौते का नवीनीकरण बांग्लादेश के हितों की रक्षा करने वाली शर्तों पर नहीं हुआ तो लोग फिर से सड़कों पर उतरेंगे।

जापान के साथ समझौते से क्यों जुड़ा ट्रांजिट कॉरिडोर का मुद्दा?

यह विवाद बांग्लादेश और जापान के बीच हाल में हुई बातचीत के बाद सामने आया है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 26 से 29 अक्टूबर 2026 तक जापान का दौरा किया था। इस दौरान दोनों देशों ने बंगाल की खाड़ी औद्योगिक विकास पहल (BIG-B) को नई रणनीतिक सहयोग व्यवस्था में आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

इस पहल में क्षेत्रीय संपर्क, प्राकृतिक आपदाओं और भू-राजनीतिक जोखिमों से निपटने, निजी निवेश और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने जैसे विषय शामिल हैं।

जापान दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश में मातरबाड़ी डीप-सी पोर्ट के विकास में भी वित्तीय सहायता दे रहा है। जापानी अधिकारियों की व्यापक क्षेत्रीय संपर्क योजना में बांग्लादेश के रास्ते भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने की परिकल्पना शामिल रही है।

हालांकि, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि जापान यात्रा के दौरान किसी तीसरे देश से जुड़ा मुद्दा चर्चा में नहीं था। उनके मुताबिक, बातचीत का केंद्र भारत नहीं, बल्कि बांग्लादेश और जापान की आर्थिक साझेदारी थी।

तारिक रहमान की जापान यात्रा के बाद भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत और जापान के बीच मजबूत साझेदारी है। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत से जुड़े सहयोग और संपर्क परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की भारत की इच्छा भी जाहिर की थी।

भारत के लिए पूर्वोत्तर राज्यों तक बेहतर संपर्क और क्षेत्रीय व्यापार महत्वपूर्ण है। वहीं, बांग्लादेश में इस तरह की परियोजनाओं को लेकर संप्रभुता, जल अधिकार और सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाए जा रहे हैं।

क्या ट्रांजिट कॉरिडोर पर फैसला हो चुका है?

फिलहाल नाहिद इस्लाम का बयान प्रस्तावित कॉरिडोर के विरोध और राजनीतिक आरोपों को सामने लाता है। उपलब्ध रिपोर्टों में भारत के लिए नए ट्रांजिट कॉरिडोर को अंतिम मंजूरी मिलने की पुष्टि नहीं है। बांग्लादेश सरकार ने भी कहा है कि जापान के साथ हालिया बातचीत में किसी तीसरे देश का मुद्दा शामिल नहीं था।

इसलिए इस मामले को फिलहाल राजनीतिक विरोध और क्षेत्रीय संपर्क को लेकर जारी बहस के रूप में देखना चाहिए। आने वाले समय में गंगा जल संधि के नवीनीकरण और भारत-बांग्लादेश संपर्क व्यवस्था पर दोनों देशों की बातचीत अहम होगी।

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