JDU में अनंत सिंह के निष्कासन से बढ़ी राजनीतिक हलचल

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पटना, 29 अक्टूबर 2026 | बिहार में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद अक्टूबर 2026 में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में बदल गया। पार्टी ने मोकामा के विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार किया था और जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया था।

इस पूरे घटनाक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की भूमिका भी चर्चा में रही। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच किसी औपचारिक टकराव की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे पार्टी के भीतर मतभेदों और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के संदर्भ में देखना उचित होगा।

अनंत सिंह को किया सामने

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र को ले कर जब मोकामा के विधायक अनंत सिंह का विरोध खुल कर आया तो पार्टी को तात्कालिक कार्रवाई करनी चाहिए थी। लेकिन JDU इस प्रकरण को तमाशा बना रही थी या अपरोक्ष रूप से किसी को घेरने की तैयारी कर रही थी? अनंत सिंह के विरोध को जितनी जगह मीडिया ने दी, उससे जनता दल यू के अनुशासन पर सवाल उठते चले गए। मीडिया के लिए यह महज टीआरपी का मसला था, लेकिन पर पार्टी के लिए? ऐसा लगा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के कुछ नेता भी इस आंच में कुछ राजनीतिक स्वार्थ पकाना चाह रहे थे। अनंत सिंह पार्टी के अनुशासन के विरुद्ध जितना ज्यादा उग्र हो रहे थे, पार्टी ने उतनी ही चुप्पी साध ली थी। जब पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगा तो जनता दल यू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने यह जिम्मेवारी केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को यह कहते सौंप दी कि मामला उनके संसदीय क्षेत्र का है तो वही इसे सुलझाएंगे।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

पटना स्नातक सीट पर जेडीयू ने अपने मौजूदा विधान परिषद सदस्य और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था। इसी सीट पर जन सुराज ने अनुज सिंह को मैदान में उतारा। मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने नीरज कुमार का समर्थन करने के बजाय अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार किया और उनके नामांकन कार्यक्रम में भी शामिल हुए।

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है। अनंत सिंह ने कहा था कि विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज कुमार ने उनके खिलाफ काम किया था। इसी नाराजगी को उन्होंने विधान परिषद चुनाव में अपने रुख की वजह बताया। इस तरह पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ एक मौजूदा विधायक का प्रचार जेडीयू के लिए अनुशासन का मुद्दा बन गया।

ललन सिंह को दी गई थी विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी

2 अक्टूबर को जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि पार्टी ने अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी ललन सिंह को दी है। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा था कि यह मामला ललन सिंह के क्षेत्र से जुड़ा है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।

5 अक्टूबर को नीतीश कुमार और ललन सिंह के बीच भी इस विवाद को लेकर बातचीत की खबर आई थी। हालांकि, उस बैठक में क्या निर्णय हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी। बाद में अनंत सिंह का नीरज कुमार के खिलाफ विरोध जारी रहा और मामला पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई तक पहुंच गया।

अनंत सिंह पर कार्रवाई क्यों हुई?

24 अक्टूबर को जेडीयू की बिहार इकाई के अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने अनंत सिंह और नीलम देवी की प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने की घोषणा की। पार्टी ने आरोप लगाया कि अनंत सिंह ने निर्देशों की अनदेखी की, वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए और पार्टी के उम्मीदवार के विरुद्ध दूसरे दल के प्रत्याशी का प्रचार किया।

पार्टी ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता के संबंध में भी विधानसभा अध्यक्ष से कार्रवाई करने की सिफारिश की। यह सिफारिश अपने आप सदस्यता समाप्त नहीं करती; इस पर फैसला संवैधानिक प्रक्रिया के तहत संबंधित प्राधिकारी को करना होता है।

ललन सिंह और संजय झा की भूमिका को लेकर मीडिया में राजनीतिक मतभेदों की चर्चा हुई। संजय झा ने विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी ललन सिंह को देने की बात कही थी, जबकि बाद के घटनाक्रम में अनंत सिंह पर कार्रवाई हुई। इन तथ्यों से पार्टी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल जरूर उठते हैं, लेकिन दोनों नेताओं के बीच सीधी लड़ाई या किसी एक नेता की वजह से अनंत सिंह पर कार्रवाई होने का निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

नीरज कुमार की जीत और आगे की स्थिति

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में नीरज कुमार की जीत के बाद भी विवाद की चर्चा जारी रही। 29 अक्टूबर को उन्होंने संजय झा सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और ललन सिंह से आशीर्वाद लेने से इनकार करने वाला बयान दिया। इससे चुनाव के दौरान पैदा हुई नाराजगी का मुद्दा फिर सामने आया।

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के तीन स्पष्ट तथ्य हैं: अनंत सिंह ने पार्टी उम्मीदवार का विरोध किया, ललन सिंह को विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी दी गई और बाद में जेडीयू ने अनंत सिंह व नीलम देवी को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। ललन सिंह और संजय झा के बीच मतभेदों की चर्चा को इन तथ्यों से अलग रखकर देखना जरूरी है, क्योंकि दोनों के बीच कथित टकराव की पूरी तस्वीर सार्वजनिक रूप से प्रमाणित नहीं है।

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