योगी सरकार की पहल से समावेशी शिक्षा को नई दिशा, 9.20 लाख शिक्षक प्रशस्त 2.0 से जुड़े

0

लखनऊ , 22 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में विद्यालयी शिक्षा को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने के लिए प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही इस पहल का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करना और उनकी शैक्षिक जरूरतों को समझने में शिक्षकों को सक्षम बनाना है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में 9,20,169 शिक्षक प्रशस्त 2.0 प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं, जबकि 8,15,309 शिक्षक प्रशिक्षण से संबंधित सभी वीडियो देख चुके हैं। यह जानकारी अक्टूबर 2026 में सामने आई थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में विद्यालयी शिक्षा को तकनीक, संवेदनशीलता और समावेशन से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की शिक्षा संबंधी प्राथमिकताओं में प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझना और उसे सीखने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए शिक्षकों को सक्षम बनाना महत्वपूर्ण है।

इसी क्रम में प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षिक जरूरतों को समझने से संबंधित डिजिटल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।

समावेशी शिक्षा की समझ विद्यालयी व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अद्यतन प्रदेश के 75 जनपदों में कुल 16,29,945 शिक्षकों में से 9,20,169 शिक्षक प्रशस्त 2.0 पर ऑनबोर्ड हो चुके थे। वहीं, 8,15,309 शिक्षकों ने प्रशिक्षण से संबंधित सभी वीडियो देख लिए थे। यह पहल डिजिटल माध्यम से शिक्षकों की क्षमता विकसित करने और समावेशी शिक्षा की समझ को विद्यालयी व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

जनपदों में डिजिटल सहभागिता
अद्यतन आंकड़ों के अनुसार रामपुर में 90.5 प्रतिशत, पीलीभीत में 88.7 प्रतिशत और लखीमपुर खीरी में 86.3 प्रतिशत शिक्षक प्रशस्त 2.0 पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं। इसी प्रकार, सभी प्रशिक्षण वीडियो देखने वाले शिक्षकों का प्रतिशत रामपुर में 88.3, पीलीभीत में 84.6 और लखीमपुर खीरी में 82.5 प्रतिशत दर्ज है।

डिजिटल प्रशिक्षण से सशक्त हो रहे शिक्षक
शिक्षकों को एप और प्रशिक्षण वीडियो के माध्यम से समावेशी शिक्षा से संबंधित जानकारी दी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कुल शिक्षकों में से 56.5 प्रतिशत शिक्षक पोर्टल पर ऑनबोर्ड हो चुके थे, जबकि 50 प्रतिशत शिक्षकों ने सभी प्रशिक्षण वीडियो देख लिए थे।

है।

प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों को ऐसे बच्चों की जरूरतों को पहचानने और उनकी शैक्षिक आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इससे शिक्षकों को बच्चों के साथ अधिक संवेदनशीलता से काम करने और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, डिजिटल प्रशिक्षण के वास्तविक परिणाम इस बात पर भी निर्भर करेंगे कि विद्यालयों में सीखी गई जानकारी को किस तरह लागू किया जाता है और बच्चों को जरूरी संसाधन तथा सहयोग उपलब्ध कराए जाते हैं।

डिजिटल प्रशिक्षण से मजबूत होगी विद्यालयी शिक्षा

शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक का उपयोग शिक्षकों तक प्रशिक्षण सामग्री पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। डिजिटल वीडियो और ऑनलाइन संसाधनों की मदद से बड़ी संख्या में शिक्षकों को एक साझा प्रशिक्षण प्रक्रिया से जोड़ना संभव होता है।

प्रशस्त 2.0 के जरिए उत्तर प्रदेश में समावेशी शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल की सफलता के लिए शिक्षकों की नियमित भागीदारी, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और विद्यालय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन महत्वपूर्ण होंगे।

कुल मिलाकर, प्रशस्त 2.0 से जुड़े 9.20 लाख से अधिक शिक्षक उत्तर प्रदेश में समावेशी शिक्षा की दिशा में चल रहे प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आगे चुनौती इस प्रशिक्षण को कक्षा में प्रभावी रूप से लागू करने और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार बेहतर शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराने की होगी।

Leave A Reply

Your email address will not be published.