बिहार MLC चुनाव: वोटिंग प्रतिशत से किसे फायदा? महागठबंधन में फूट से बढ़ी चुनौती!

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पटना, 24 अक्टूबर 2026 | बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर मतदान खत्म होने के बाद अब सभी की नजरें 27 अक्टूबर को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। मतदान प्रतिशत ने राजनीतिक दलों के बीच जीत-हार के आकलन को तेज कर दिया है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में स्नातक सीटों के मुकाबले अधिक मतदान दर्ज किया गया, जबकि महागठबंधन के घटक दलों के बीच कई सीटों पर आपसी मुकाबला भी देखने को मिला। इसी बीच प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की एंट्री ने चुनावी समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है।

ज्यादा प्रतिशत मतदान होने की बात

भारत के चुनाव आयोग के अनुसार, कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में चार स्नातक सीटों में से सबसे ज़्यादा 52.51 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे कम 36.19 प्रतिशत मतदान हुआ। तिरहुत और दरभंगा में क्रमशः 42.15 प्रतिशत और 42 प्रतिशत मतदान हुआ। टीचर्स चुनाव क्षेत्रों में, सारण में सबसे ज़्यादा 87.16 परसेंट वोटिंग हुई, उसके बाद दरभंगा में 79 परसेंट, तिरहुत में 78.10 परसेंट और पटना में 56.89 परसेंट वोटिंग हुई।

वोटिंग प्रतिशत क्या संकेत दे रहा है?

23 अक्टूबर को हुए मतदान के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 74.55 प्रतिशत और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में 43.87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। हालांकि, 24 अक्टूबर को जारी अपडेटेड आंकड़ों में निर्वाचन क्षेत्रों के अनुसार मतदान प्रतिशत में बदलाव बताया गया। इसलिए अंतिम विश्लेषण के लिए संशोधित आधिकारिक आंकड़ों को आधार बनाना जरूरी है।

शिक्षक सीटों पर ज्यादा मतदान को मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन केवल अधिक वोटिंग से किसी पार्टी की जीत तय नहीं होती। असली तस्वीर इस बात पर निर्भर करेगी कि किस उम्मीदवार को अपने समर्थक मतदाताओं का कितना समर्थन मिला और विरोधी खेमों के वोट किस तरह बंटे।

शिक्षक सीटों पर ज्यादा मतदान, स्नातक सीटों पर चुनौती

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में शुरुआती आंकड़ों के अनुसार सारण में सबसे अधिक 87.16 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इसके बाद दरभंगा में 79 प्रतिशत, तिरहुत में करीब 78 प्रतिशत और पटना में 56.89 प्रतिशत मतदान हुआ।

वहीं, स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में कोसी में 52.51 प्रतिशत, तिरहुत में 42.15 प्रतिशत, दरभंगा में 42 प्रतिशत और पटना में 36.19 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दोनों श्रेणियों के मतदाताओं की भागीदारी में बड़ा अंतर रहा। हालांकि, मतदान प्रतिशत अपने आप में किसी उम्मीदवार की जीत या हार का प्रमाण नहीं है।

महागठबंधन में फूट से किसे मिल सकता है फायदा?

इस चुनाव में विपक्षी महागठबंधन के सामने एक बड़ी चुनौती आपसी तालमेल की रही। कई निर्वाचन क्षेत्रों में राजद और कांग्रेस ने अलग-अलग उम्मीदवार उतारे, जिससे विपक्षी वोटों के बंटवारे की आशंका बनी। पटना शिक्षक, पटना स्नातक, दरभंगा स्नातक और कोसी स्नातक सीटों पर दोनों दलों के उम्मीदवार आमने-सामने हैं।

राजनीतिक तौर पर इसका फायदा NDA को मिल सकता है, खासकर उन सीटों पर जहां मुकाबला करीबी हो। हालांकि, यह तभी संभव होगा जब NDA के उम्मीदवारों को अपने पारंपरिक समर्थकों का पर्याप्त वोट मिले। महागठबंधन के वोट बंटने से अपने आप NDA की जीत सुनिश्चित नहीं हो जाती।

प्रशांत किशोर की जन सुराज ने बढ़ाई चुनौती

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी की एंट्री ने मुकाबले में एक नया पक्ष जोड़ दिया है। जन सुराज के उम्मीदवार विपक्षी दलों के असंतुष्ट मतदाताओं और दूसरे विकल्प की तलाश कर रहे वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश में हैं।

पटना स्नातक सीट पर जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह को अनंत सिंह का समर्थन मिलना भी चर्चा का विषय रहा। अनंत सिंह जेडीयू के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ अनुज सिंह के पक्ष में खड़े नजर आए। इससे जेडीयू के लिए मुकाबला राजनीतिक रूप से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।

हालांकि, जन सुराज को कितने वोट मिलेंगे और उसका असर NDA या महागठबंधन में से किस पर ज्यादा पड़ेगा, यह मतगणना के बाद ही साफ होगा।

NDA के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव को NDA के लिए संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक प्रभाव का आकलन करने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर पटना स्नातक सीट पर जेडीयू के भीतर दिखाई दिए मतभेद ने इस मुकाबले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार लगातार चौथी बार जीत हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, अनंत सिंह के समर्थन से जन सुराज के अनुज सिंह का मुकाबला चर्चा में है। इस सीट का परिणाम NDA की चुनावी रणनीति और पार्टी के भीतर एकजुटता को लेकर भी कई सवालों के जवाब दे सकता है।

27 अक्टूबर को खुलेगा उम्मीदवारों की किस्मत का पिटारा

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए कुल 150 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान के बाद अब मतगणना का इंतजार है, जो 27 अक्टूबर को निर्धारित है। परिणाम से पता चलेगा कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं ने किस पार्टी और उम्मीदवार पर भरोसा जताया।

फिलहाल, मतदान प्रतिशत को किसी एक गठबंधन की जीत का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। महागठबंधन में आपसी मुकाबला, जन सुराज की मौजूदगी और NDA के भीतर राजनीतिक समीकरण—इन तीनों का असर नतीजों पर पड़ सकता है। अंतिम फैसला मतगणना ही करेगी।

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