चंडीगढ़, 22 अक्टूबर 2026 । पंजाब सरकार से जुड़े करीब 25 साल पुराने पेंशन मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद अदालत में जवाब दाखिल नहीं होने पर हाईकोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को 28 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। मामला सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशन लाभों की दोबारा गणना और उनमें बढ़ोतरी की मांग से जुड़ा है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 25 साल पुराने मामले में बार-बार अवसर मिलने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर पंजाब सरकार के प्रति नाराजगी जताई है। जस्टिस संदीप मोदगिल की एकल पीठ ने पंजाब के मुख्य सचिव को 28 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मुख्य सचिव पर लगाए गए दो लाख रुपये के जुर्माने पर खंडपीठ की रोक से व्यक्तिगत पेशी के निर्देश और अवमानना संबंधी कारण बताओ नोटिस पर रोक नहीं लगी है।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने बताया कि मुख्य सचिव पर जुर्माना लगाने के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी गई थी और वहां से जुर्माने पर रोक मिल गई है।
नोटिस का जवाब देने के निर्देश बरकरार
एकल पीठ ने संबंधित आदेशों का अवलोकन करने के बाद कहा कि रोक केवल जुर्माने पर है। मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और अवमानना संबंधी नोटिस का जवाब देने के निर्देश बरकरार हैं।
मुख्य सचिव को अदालत में स्पष्ट करना होगा कि इतने लंबे समय से लंबित मामले में बार-बार अवसर मिलने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने लिखित जवाब क्यों दाखिल नहीं किया।
सरकार की दलीलों पर सवाल
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के रुख पर असंतोष जताते हुए कहा कि खंडपीठ के समक्ष रखी गई पांचों दलीलें न्यायिक रिकार्ड के विपरीत हैं। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि गलत तथ्य पेश कर अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया गया। जवाब दाखिल करने में देरी पर अदालत ने मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांगा।
करीब 25 साल से लंबित इस मामले में जवाब दाखिल नहीं होने पर हाईकोर्ट ने पहले मुख्य सचिव पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया था और उनके खिलाफ अवमानना संबंधी कारण बताओ नोटिस जारी कर व्यक्तिगत पेशी का निर्देश दिया था।
सरकार ने जुर्माने के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी, जहां उस पर रोक लगाई गई। एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि जुर्माने पर रोक से पेशी और नोटिस संबंधी निर्देश निष्प्रभावी नहीं होंगे।
जुर्माने पर रोक, लेकिन पेशी से राहत नहीं
राज्य सरकार ने दो लाख रुपये की लागत लगाने वाले आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी, जहां इस आदेश पर रोक मिल गई। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस रोक से मुख्य सचिव की व्यक्तिगत पेशी और अवमानना संबंधी कारण बताओ नोटिस पर रोक नहीं लगी।
इसी वजह से हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को 28 अक्टूबर को पेश होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अदालत इस बात पर भी जवाब चाहती है कि संबंधित अधिकारियों के वेतन से जुर्माने की राशि वास्तव में काटी गई या नहीं और भुगतान किस स्रोत से किया गया।
सरकारी जवाबदेही पर अदालत की सख्ती
हाईकोर्ट की इस कार्रवाई का केंद्र लंबे समय से लंबित पेंशन विवाद और अदालत के निर्देशों का अनुपालन है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के मामलों में समय पर निर्णय और पेंशन लाभों का निस्तारण महत्वपूर्ण है, क्योंकि देरी का सीधा असर लाभार्थियों पर पड़ सकता है।
अब 28 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई में मुख्य सचिव को अदालत के सवालों का जवाब देना होगा। इस सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने और पहले दिए गए निर्देशों का पालन करने में देरी के संबंध में क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है।