चंडीगढ़, 16 अक्टूबर 2026 । इस मामले में अब नया मोड़ आ गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत मान की फ्रांस यात्रा को मंजूरी दे दी। अदालत का विस्तृत आदेश अभी प्रतीक्षित है।
केंद्र सरकार ने सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर संभावित खतरे और फ्रांस सरकार के औपचारिक निमंत्रण की स्थिति पर सवाल उठाए। वहीं, पंजाब सरकार ने दलील दी कि यात्रा व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए थी और मंजूरी नहीं देने का फैसला बिना पर्याप्त कारण बताए लिया गया।
याचिका में क्या
पंजाब के सीएम भगवंत मान को 17 से 21 अक्टूबर तक प्रदर्शनी में एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना था। भारत संघ के खिलाफ 56 पन्नों की एक याचिका में राज्य ने तर्क दिया कि यह दौरा पंजाब की शीर्ष सहकारी संस्था, ‘पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड’ (मार्कफेड) की भागीदारी के सिलसिले में प्रस्तावित किया गया था। पंजाब के सहकारिता विभाग ने तीन और आठ सितंबर को पत्र लिखकर विदेश मंत्रालय से मंजूरी देने का अनुरोध किया था। सरकार ने 9 सितंबर को राजनीतिक मंजूरी के लिए एक ऑनलाइन आवेदन भेजा।
फ्रांस में क्या करने जाने वाले थे भगवंत मान?
मुख्यमंत्री भगवंत मान का 15 से 21 अक्टूबर तक फ्रांस जाने का कार्यक्रम था। इस यात्रा का उद्देश्य पंजाब के कृषि उत्पादों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और राज्य के कारोबार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ावा देना था।
यात्रा से जुड़े प्रमुख तथ्य
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कार्यक्रम: SIAL Paris 2026 अंतरराष्ट्रीय खाद्य व्यापार प्रदर्शनी।
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स्थान: पेरिस, फ्रांस।
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तारीख: 17 से 21 अक्टूबर 2026।
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प्रतिनिधिमंडल: मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भी जाना था।
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मुख्य उद्देश्य: पंजाब के कृषि और खाद्य उत्पादों के लिए नए खरीदार, निवेशक और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी संपर्क तलाशना।
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खर्च: पंजाब सरकार की याचिका के मुताबिक, यात्रा का पूरा खर्च मार्कफेड उठाने वाला था।
पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में क्या दलील दी?
पंजाब सरकार ने विदेश मंत्रालय के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि यात्रा के लिए जरूरी प्रशासनिक मंजूरियां ली गई थीं और भारतीय मिशन से भी संपर्क किया गया था। इसके बावजूद आवेदन को बिना कारण बताए अस्वीकार कर दिया गया।
राज्य सरकार ने अदालत से केंद्र के फैसले को रद्द करने की मांग की। उसका तर्क था कि विदेश यात्रा की मंजूरी देने या रोकने की प्रक्रिया स्पष्ट मानदंडों पर आधारित होनी चाहिए और राज्य के प्रशासनिक कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
केंद्र सरकार ने अनुमति क्यों रोकी?
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया। केंद्र की ओर से यह भी कहा गया कि फ्रांस सरकार की ओर से औपचारिक निमंत्रण नहीं होने की स्थिति में वहां जरूरी सुरक्षा व्यवस्था और राजकीय प्रोटोकॉल सुनिश्चित करने में कठिनाई हो सकती है।
दूसरी ओर, पंजाब सरकार ने इन दलीलों पर आपत्ति जताई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने भगवंत मान को फ्रांस जाने की अनुमति दे दी। विस्तृत न्यायिक आदेश आने के बाद अदालत के फैसले का पूरा आधार स्पष्ट होगा।