चीन से मिले कलपुर्जों की मदद से मिसाइल बना रहे हूती विद्रोही

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बीजिंग/ सना  , 15 अक्टूबर 2026 । यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती विद्रोही अपनी मिसाइल क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, हूती लड़ाके चीन के आपूर्तिकर्ताओं से मिले कलपुर्जों की मदद से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। ब्रिटेन स्थित हथियार निगरानी संस्था Conflict Armament Research (CAR) की जांच में ऐसे पुर्जों और आपूर्ति नेटवर्क के संकेत मिले हैं, जिनका इस्तेमाल मिसाइल निर्माण में किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित मिसाइल ईरान की ‘खैबर शिकन’ प्रणाली से मिलती-जुलती हो सकती है। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि हूती विद्रोहियों ने नई मिसाइल का निर्माण पूरा कर लिया है या वह पूरी तरह परिचालन में है।

रिपोर्ट के मुताबिक, विद्रोही ईरान में डिजाइन हुई खैबर शिकन मिसाइल जैसी मिसाइल तैयार करना चाहते हैं, जिसकी मारक क्षमता करीब 1500 किलोमीटर है।

अगर हूती ऐसा हथियार बनाने में सफल होते हैं, तो वे सऊदी अरब के अलावा इजराइल को भी ज्यादा सटीक तरीके से निशाना बना सकते हैं।

हथियार बनाने के लिए जरूरी सामान जुटा रहे हूती

रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के अधिकारियों ने जुलाई में चीन से भेजे गए दो संदिग्ध सामानों की खेप पकड़ी थी।

इनमें मिसाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई अहम पुर्जे मिले। पकड़ी गई खेप चीन से भेजी गई थी। इसे यमन के होदेइदा बंदरगाह पहुंचाया जाना था।

इजराइली अधिकारियों का कहना है कि इस बंदरगाह का इस्तेमाल ईरान हथियारों की सप्लाई के लिए करता रहा है।

पकड़ी गई खेप में क्या-क्या मिला?

रिपोर्ट तैयार करने वाली संस्था के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज के मुताबिक, हूती ईरान में डिजाइन की गई खास तरह की मिसाइल बनाने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन पुर्जों का इस्तेमाल आम नागरिक कामों में करना मुश्किल है।

  • खेप में रॉकेट मोटर के हिस्से, मिसाइल को स्थिर रखने वाले पुर्जे और रॉकेट मोटर को चालू करने वाले उपकरण मिले।
  • फेनोलिक रेजिन नाम का पदार्थ भी था। इसका इस्तेमाल मिसाइल की गर्मी से बचाने वाली परत बनाने में होता है। तेज रफ्तार से उड़ते समय मिसाइल का बाहरी हिस्सा बहुत गर्म हो जाता है। यह परत उसे उस गर्मी से बचाती है।

हूतियों की हथियार बनाने की क्षमता पहले से ज्यादा

हूती करीब दो दशक पहले यमन में एक विद्रोही संगठन के तौर पर उभरे थे। शुरुआत में उनके पास यमन की सेना से हासिल सोवियत दौर के और उत्तर कोरिया में बने हथियार थे। समय के साथ उन्हें ज्यादा आधुनिक हथियार और तकनीक मिलने लगी।

  • सऊदी अरब के साथ मौजूदा संघर्ष में हूती बैलिस्टिक मिसाइलों और लंबी दूरी तक उड़ने वाले ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
  • वे पहले भी इजराइल की ओर मिसाइलें और ड्रोन दाग चुके हैं। दोनों देशों के बीच दूरी 1,600 किलोमीटर से ज्यादा है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, अब हूती सिर्फ तैयार हथियारों की तस्करी पर निर्भर नहीं रहना चाहते।
  • वे अलग-अलग देशों से पुर्जे मंगाकर अपने नियंत्रण वाले इलाकों में हथियार जोड़ने और बनाने की क्षमता बढ़ा रहे हैं।

मध्य पूर्व की सुरक्षा पर क्या पड़ सकता है असर?

हूती विद्रोहियों की मिसाइल निर्माण क्षमता में संभावित वृद्धि सऊदी अरब, इजरायल और लाल सागर के आसपास सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकती है। अधिक दूरी तक मार करने वाले हथियार विकसित होने पर क्षेत्रीय देशों को अपनी रक्षा व्यवस्था और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर अतिरिक्त ध्यान देना पड़ सकता है।

फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि क्या हूती विद्रोही जरूरी तकनीक, कलपुर्जे और विशेषज्ञता जुटाकर नई मिसाइल प्रणाली को सफलतापूर्वक विकसित कर पाएंगे। CAR की रिपोर्ट उनके प्रयासों और आपूर्ति नेटवर्क के बारे में संकेत देती है, लेकिन नई मिसाइल के तैयार होने की पुष्टि नहीं करती।

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