देहरादून, 15 अक्टूबर 2026 । उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हो गई है। राज्य पुलिस और सरकार ने मामले में की गई कार्रवाई का विवरण साझा करते हुए बताया है कि घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई और करीब 88 दिनों के भीतर लगभग 500 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई।
पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून-व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन के मुताबिक, जांच के दौरान गवाहों के बयान, कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक साक्ष्यों जैसे पहलुओं पर काम किया गया। मामले में अदालत ने मई 2023 में तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, अंकिता के परिवार और विपक्ष की ओर से कुछ सवालों तथा कथित VIP एंगल की जांच को लेकर आवाज उठती रही है।
अपर पुलिस महानिदेशक ने बताया कि घटना की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर तत्काल विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। डीआईजी स्तर की महिला आईपीएस अधिकारी को एसआईटी का अध्यक्ष बनाया गया, ताकि प्रकरण की गहन एवं प्रभावी जांच सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि एसआईटी ने प्रकरण की जांच के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक एवं भौतिक साक्ष्यों का गहनता से संकलन किया। इसके अतिरिक्त अभियुक्तों से विस्तृत पूछताछ, फॉरेंसिक रिपोर्टों एवं गवाहों के बयानों सहित सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया गया। एसआईटी ने 88 दिनों में जांच पूरी कर लगभग 500 पृष्ठों का विस्तृत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
SIT ने 88 दिन में तैयार की 500 पन्नों की चार्जशीट
जांच के लिए विशेष जांच टीम का गठन किया गया। पुलिस के अनुसार, SIT ने मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए और गवाहों के बयान दर्ज किए। करीब 500 पन्नों की चार्जशीट में लगभग 100 गवाहों के बयान और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को शामिल किया गया था।
जांच में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट जैसे पहलुओं की पड़ताल की गई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र अदालत में पेश किया।
रिपोर्टों के मुताबिक, चार्जशीट 22 दिसंबर 2022 को दाखिल की गई थी। पुलिस ने इसे जांच की समयबद्ध प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया है। हालांकि, किसी भी मामले में जांच की गति के साथ-साथ साक्ष्यों की विश्वसनीयता और अदालत में उनकी न्यायिक जांच भी महत्वपूर्ण होती है।
मई 2023 में तीनों दोषियों को उम्रकैद
मामले की सुनवाई के बाद कोटद्वार की अदालत ने मई 2023 में पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को अंकिता भंडारी की हत्या का दोषी ठहराया और तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत का फैसला अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर आया। उत्तराखंड सरकार ने हालिया बयान में गिरफ्तारी, SIT जांच, चार्जशीट और सजा को मामले में की गई कार्रवाई के प्रमुख पड़ावों के रूप में गिनाया है।
सरकार के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर कानून के तहत भी कार्रवाई की गई थी। अभियोजन की ओर से मामले को अदालत में प्रभावी ढंग से पेश किया गया और आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी खारिज होती रहीं।
VIP एंगल को लेकर परिवार के सवाल
अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्यायिक फैसले के बावजूद कथित VIP एंगल को लेकर सवाल पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। अंकिता के माता-पिता और कुछ विपक्षी नेताओं ने इस पहलू की जांच की मांग उठाई है। परिवार की मांगों और मामले की जांच को लेकर हाल के दिनों में दिल्ली में भी विरोध प्रदर्शन हुआ।
15 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली में प्रदर्शन किया और राजनीतिक नियुक्ति को लेकर भी विरोध जताया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने परिवार से मुलाकात की। दूसरी ओर, उत्तराखंड सरकार ने अपने बचाव में कहा कि मामले में शुरुआत से कार्रवाई की गई, आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, SIT ने जांच की और अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई।