नई दिल्ली, 08 अक्टूबर 2026 । भारत में डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए बड़ी खबर है। UPI ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लागू करने की तारीख आगे बढ़ सकती है। नई व्यवस्था को पहले 15 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाना था, लेकिन अब इसे 1 जनवरी 2027 तक टालने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, अभी इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। इस प्रस्ताव पर NPCI और संबंधित सरकारी विभागों के बीच चर्चा चल रही है और अंतिम निर्णय का इंतजार है।
15 अक्टूबर से लागू होना था नया MDR
नई व्यवस्था के तहत ₹2,000 से ज्यादा के कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जाना है। इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है।
इसका मतलब यह है कि प्रस्तावित व्यवस्था सीधे हर UPI यूजर से अलग से शुल्क वसूलने की योजना नहीं है। MDR मुख्य रूप से व्यापारी लेनदेन के भुगतान इकोसिस्टम में लागू होगा।
अब 1 जनवरी 2027 तक टलने की संभावना
रिपोर्टों के अनुसार, व्यापारी संगठनों और पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े पक्षों ने त्योहारी सीजन को देखते हुए MDR लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है। अब 1 जनवरी 2027 से इसे लागू करने का विकल्प सामने आया है।
फेस्टिव सीजन के दौरान ऑनलाइन और डिजिटल भुगतान में भारी बढ़ोतरी होती है। ऐसे में पेमेंट कंपनियों, बैंकों और कारोबारियों को नए सिस्टम के लिए अतिरिक्त समय देने के उद्देश्य से तारीख आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि प्रस्तावित MDR को सीधे आम यूजर से वसूले जाने वाले UPI चार्ज के रूप में नहीं समझना चाहिए।
सरकार के मुताबिक, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे। इसके अलावा ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों के लेनदेन भी मुफ्त रहने हैं।
सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M ट्रांजैक्शन इस नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।
प्रस्तावित व्यवस्था में ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा P2M ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा। ₹75,000 या उससे ज्यादा के भुगतान पर अधिकतम MDR ₹300 तक सीमित रहेगा।
उदाहरण के तौर पर ₹10,000 के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की दर से MDR ₹40 बनता है। हालांकि यह MDR भुगतान इकोसिस्टम के बीच बांटा जाएगा और इसे सरकार द्वारा सीधे वसूला जाने वाला टैक्स नहीं बताया गया है।
सरकार ने क्या कहा है?
वित्त मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आम नागरिकों के लिए UPI को शुल्क-मुक्त रखा गया है। सरकार का कहना है कि P2P ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा और अधिकांश मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी प्रभावित नहीं होंगे।
इसलिए नए MDR को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी चर्चाओं से सावधान रहने की जरूरत है, जिनमें हर UPI भुगतान पर शुल्क लगने की बात कही जा रही है।
MDR व्यवस्था में बदलाव का असर पेमेंट कंपनियों, बैंकों और कारोबारियों के बीच राजस्व बंटवारे पर भी पड़ सकता है। पेमेंट एग्रीगेटर्स और बैंक इस व्यवस्था के तहत अपने हिस्से को लेकर बातचीत कर रहे हैं।
अगर लागू होने की तारीख जनवरी 2027 तक टलती है, तो इससे संबंधित कंपनियों और व्यापारियों को तकनीकी और कारोबारी बदलावों के लिए कुछ अतिरिक्त समय मिल सकता है।
अंतिम फैसला अभी बाकी
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि UPI MDR की तारीख टलने की खबर को संभावित बदलाव के रूप में देखा जाए। 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली व्यवस्था को जनवरी 2027 तक टालने पर विचार चल रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय NPCI और संबंधित पक्षों की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
अगर तारीख बढ़ती है तो त्योहारी सीजन के दौरान UPI भुगतान करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों को तत्काल नई MDR व्यवस्था का सामना नहीं करना पड़ेगा।