दिल्ली में निजी जमीन पर प्राइवेट स्कूल खोलना हुआ आसान

जनहित जांच की अनिवार्यता में बड़ा बदलाव

0

नई दिल्ली, 03 अक्टूबर 2026 । दिल्ली में निजी जमीन पर प्राइवेट स्कूल खोलने और उन्हें मान्यता देने से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली स्कूल एजुकेशन रूल्स, 1973 में संशोधन करते हुए निजी स्वामित्व वाली कमर्शियल जमीन पर प्रस्तावित प्राइवेट स्कूलों को एक अहम जनहित जांच से छूट दी है। संशोधित नियम 30 सितंबर 2026 को अधिसूचित किए गए हैं।

इस बदलाव के बाद निजी जमीन पर स्कूल खोलने के इच्छुक सोसायटी और पब्लिक ट्रस्ट के प्रस्तावों के लिए पहले की तरह यह जांच जरूरी नहीं होगी कि संबंधित इलाके में नया स्कूल खोलना जनहित में है या नहीं।

क्या है नया नियम

नए नियम के तहत अब सरकार या नगर निगम से रियायती दर पर पट्टे या नीलामी के जरिए मिली संस्थागत जमीन और निजी स्वामित्व वाली कमर्शअल जमीन पर स्कूल खोलने के प्रस्तावों के लिए अलग-अलग प्रावधान होंगे। नए नियम को अधिसूचित होने के बाद प्राइवेट स्कूल खोलने की राह कुछ आसान होगी।

रियल नीड’ की शर्त भी हटाई गई

नए प्रावधानों में स्कूल की मान्यता से जुड़ी उस शर्त को भी हटाया गया है, जिसके तहत किसी इलाके में नए स्कूल की वास्तविक जरूरत का आकलन किया जाता था। पहले प्रशासन क्षेत्र में पहले से मौजूद स्कूलों और स्थानीय जरूरतों को देखते हुए यह तय कर सकता था कि नए स्कूल की आवश्यकता है या नहीं।

संशोधन के बाद निजी स्वामित्व वाली कमर्शियल जमीन पर प्रस्तावित स्कूलों के मामले में यह विशेष जनहित आकलन लागू नहीं होगा। हालांकि स्कूलों को अन्य लागू नियमों, मान्यता की शर्तों और आवश्यक मानकों का पालन करना होगा।

यह बदलाव सभी तरह की जमीन पर लागू नहीं है। यदि कोई सोसायटी या पब्लिक ट्रस्ट सरकार या नगर निगम से रियायती दर पर अथवा नीलामी के जरिए संस्थागत जमीन लेकर प्राइवेट स्कूल स्थापित करना चाहता है, तो उसके लिए Essentiality Certificate की जरूरत बनी रहेगी।

इस प्रमाणपत्र के जरिए संबंधित क्षेत्र में प्रस्तावित स्कूल की आवश्यकता का आकलन किया जाएगा। प्रशासन आवेदक की ओर से दी गई जानकारी की जांच करने के साथ आवश्यक पूछताछ भी कर सकता है और उसके बाद प्रमाणपत्र जारी करने पर फैसला लिया जाएगा।

नियमों में बदलाव का मकसद क्या है

संशोधित नियमों का एक प्रमुख असर यह है कि निजी स्वामित्व वाली कमर्शियल जमीन पर स्कूल स्थापित करने की प्रक्रिया में पहले मौजूद एक प्रशासनिक जांच कम हो गई है। इससे स्कूल स्थापित करने की योजना बना रहे निजी संस्थानों और ट्रस्टों के लिए प्रक्रिया में बदलाव आएगा।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि निजी जमीन पर कोई भी संस्था बिना अन्य नियामकीय शर्तें पूरी किए स्कूल शुरू कर सकती है। स्कूल की मान्यता, भवन, सुरक्षा, शिक्षकों की योग्यता और दूसरे लागू शिक्षा संबंधी मानकों का पालन आवश्यक रहेगा।

अगस्त में जारी ड्राफ्ट से अंतिम नियम कैसे अलग हैं

दिल्ली सरकार ने 10 अगस्त 2026 को संशोधन का ड्राफ्ट जारी कर आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। अंतिम अधिसूचना में Rule 50(ii) को हटाया गया है, जबकि Rule 44(3) को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय संशोधित किया गया है।

अंतिम नियमों के अनुसार जनहित जांच की व्यवस्था बनी हुई है, लेकिन निजी स्वामित्व वाली कमर्शियल जमीन पर सोसायटी या पब्लिक ट्रस्ट द्वारा प्रस्तावित प्राइवेट स्कूलों को इससे अपवाद दिया गया है। ड्राफ्ट पर निर्धारित अवधि में कोई आपत्ति या सुझाव प्राप्त नहीं होने की बात भी अंतिम अधिसूचना में कही गई है।

दिल्ली के निजी स्कूलों पर क्या होगा असर

नए नियमों से दिल्ली में निजी जमीन पर नए स्कूल स्थापित करने की प्रक्रिया में बदलाव आया है। खास तौर पर निजी स्वामित्व वाली कमर्शियल जमीन पर स्कूल खोलने वाले संस्थानों को पहले की तुलना में अलग प्रक्रिया का सामना करना होगा।

वहीं, सरकारी या नगर निगम की संस्थागत जमीन लेने वाले संस्थानों के लिए Essentiality Certificate की व्यवस्था जारी रहने से दोनों तरह की जमीन के लिए अलग-अलग नियम लागू होंगे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.