पटना, 03 अक्टूबर 2026 । बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों के लिए चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। चार स्नातक और चार शिक्षक सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को प्रस्तावित है। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर और नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर निर्धारित है।
इन सीटों पर एनडीए और महागठबंधन के अलावा जन सुराज पार्टी भी मैदान में है। ऐसे में कई निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला बहुकोणीय हो गया है।
राजद की रणनीति
राष्ट्रीय जनता दल ने एक खास रणनीति के तहत पटना शिक्षक क्षेत्र से डॉक्टर संजीव सिंह और स्नातक क्षेत्र से दिलीप कुमार को उम्मीदवार बना कर उतारा। योजना यह थी कि पटना शिक्षक से डॉक्टर संजीव और पटना स्नातक से दिलीप कुमार को चुनावी समीकरण के साथ उतारकर एनडीए के वोट बैंक पर हमला बोलना था। मतलब साफ था कि एनडीए के आधार वोट दिलीप कुमार (कुर्मी) और पटना स्नातक से डॉक्टर संजीव (भूमिहार) के साथ MY समीकरण को साध कर जीत का रास्ता खोजना था। मगर महागठबंधन के साथ खेला ये हो गए कि कांग्रेस पटना स्नातक क्षेत्र से एक मुस्लिम उम्मीदवार दे कर राजद के MY समीकरण का M ले उड़ी। अब ऐसे समीकरण में महागठबंधन के वोटर परेशान होंगे या फिर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की तरह जन सुराज की तरफ जा सकते हैं। हर हाल में नुकसान तो महागठबंधन के दलों का ही होगा।
पटना स्नातक सीट पर एनडीए के भीतर ही अलग समीकरण
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र इस चुनाव में विशेष चर्चा में है। यहां जदयू ने मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर जदयू विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह को समर्थन देने की घोषणा की है।
अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ अपने राजनीतिक मतभेदों का हवाला देते हुए अनुज सिंह के समर्थन की बात कही है। जदयू की ओर से पार्टी के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
यह स्थिति बताती है कि गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवार और स्थानीय स्तर पर नेताओं की पसंद के बीच अंतर भी चुनावी समीकरण का हिस्सा बन सकता है।
महागठबंधन के भीतर भी उम्मीदवारों को लेकर मतभेद सामने आए हैं। राजद ने छह सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित किए, जिसके बाद कांग्रेस ने भी पांच सीटों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया।
इनमें चार सीटों पर राजद और कांग्रेस के उम्मीदवार सीधे आमने-सामने हैं। पटना स्नातक सीट पर राजद ने दिलीप कुमार को, जबकि कांग्रेस ने असदुल्लाह खान को उम्मीदवार बनाया है। पटना शिक्षक सीट पर राजद के संजीव कुमार के सामने कांग्रेस के संजय यादव हैं। इसी तरह कोसी स्नातक और दरभंगा स्नातक सीटों पर भी दोनों दलों के उम्मीदवार आमने-सामने हैं।
वोटों के बंटवारे की स्थिति पर रहेगी नजर
स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़, संगठनात्मक नेटवर्क और स्थानीय मुद्दे चुनावी परिणाम को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल होते हैं। ऐसे में गठबंधन के घटक दलों के बीच अलग-अलग उम्मीदवार होने से मतदाताओं के सामने अधिक विकल्प मौजूद रहेंगे।
हालांकि, इन परिस्थितियों में किस उम्मीदवार को कितना समर्थन मिलेगा, इसका आकलन अंतिम परिणाम से पहले निश्चित रूप से करना उचित नहीं होगा। चुनाव में प्रत्याशियों की सक्रियता और मतदाता समूहों के बीच उनका समर्थन भी महत्वपूर्ण रहेगा।
जन सुराज ने मुकाबले को बनाया बहुकोणीय
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने आठों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है। पटना स्नातक से अनुज सिंह समेत कई सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी मैदान में हैं।
इससे उन निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबले का स्वरूप बदल गया है, जहां पहले मुख्य रूप से एनडीए और महागठबंधन के उम्मीदवारों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती थी। पटना स्नातक सीट पर जदयू उम्मीदवार के खिलाफ अनंत सिंह का जन सुराज उम्मीदवार को समर्थन इस बहुकोणीय मुकाबले को और चर्चा में ला रहा है।
फिलहाल चुनावी तस्वीर उम्मीदवारों के स्तर पर काफी हद तक स्पष्ट हो चुकी है, लेकिन नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मुकाबले की तस्वीर सामने आएगी।
पटना स्नातक सीट पर जदयू के भीतर सामने आया मतभेद और महागठबंधन में राजद-कांग्रेस की अलग-अलग दावेदारी ऐसे प्रमुख घटनाक्रम हैं, जिन पर चुनाव तक नजर बनी रहेगी। 23 अक्टूबर के मतदान के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अलग-अलग दलों और गठबंधनों के उम्मीदवारों को शिक्षक और स्नातक मतदाताओं का कितना समर्थन मिला।