यूपी राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट का दांव, सपा के कदम से 10 सीटों पर बढ़ी चुनावी हलचल
नई दिल्ली, 03 अक्टूबर 2026 । उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया तेज हो गई है। इन सीटों पर 16 अक्टूबर 2026 को मतदान प्रस्तावित है। मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में समाप्त होने वाला है। चुनाव की घोषणा के बाद से ही बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के संख्या बल को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
मौजूदा गणित के मुताबिक बिना अतिरिक्त उम्मीदवार उतारे सभी 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बन सकती है। हालांकि, अतिरिक्त नामांकन पत्र खरीदे जाने और तीसरी सीट के लिए सपा की संभावित रणनीति ने मुकाबले की संभावना को बढ़ा दिया है।
बीजेपी और सपा के एक-एक विधायक के वोटिंग नहीं करने की संभावना
राज्यसभा चुनाव का गणित इन पार्टियों के सावधान रहने की वजह है। आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत जीत के लिए जरूरी कोटा डाले गए वैध वोटों के आधार पर तय किया जाता है। विधानसभा में मौजूदा संख्या 395 के मुकाबले प्रभावी वोटिंग संख्या 393 होने की संभावना है। ऐसे में जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को पहली वरीयता के 36 वोटों की जरूरत होने के आसार हैं। बताया जाता है कि बीजेपी के विधायक नील रतन सिंह बीमार हैं और समाजवादी पार्टी के विधायक रमाकांत यादव जेल में हैं। इन हालात में इन दोनों के वोटिंग में शामिल होने की संभावना कम है।
सपा ने दो उम्मीदवारों का कराया नामांकन
समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए प्रोफेसर राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को अपना उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने 30 सितंबर को नामांकन दाखिल किया। नामांकन के दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और शिवपाल यादव भी मौजूद रहे।
संख्या बल के आधार पर सपा के दोनों उम्मीदवारों के निर्वाचन के लिए पर्याप्त समर्थन माना जा रहा है। ऐसे में पार्टी की तीसरी सीट को लेकर आगे की रणनीति पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।
राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के वोट की जरूरत है। उपलब्ध संख्या बल के आधार पर सपा अपने दो उम्मीदवारों के लिए आवश्यक 74 वोट जुटाने की स्थिति में है।
तीसरे उम्मीदवार के लिए कुल 111 वोट चाहिए होंगे। मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से सपा के पास अपने विधायकों के अलावा कुछ सहयोगी समर्थन को जोड़ने पर करीब 107 वोट का आधार बताया जा रहा है। ऐसे में तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी।
बीजेपी के सामने भी आठवीं सीट का गणित
दूसरी तरफ बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास सात सीटों के लिए पर्याप्त संख्या बल बताया जा रहा है। आठवीं सीट के लिए भी अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि 10 सीटों के चुनाव में संभावित मुकाबला मुख्य रूप से अतिरिक्त सीटों के लिए संख्या बल जुटाने पर केंद्रित हो सकता है।
इसी गणित के कारण यदि सपा तीसरा उम्मीदवार उतारती है, तो 10वीं सीट पर बीजेपी और सपा के बीच सीधा मुकाबला बनने की स्थिति पैदा हो सकती है।
तीसरे उम्मीदवार पर सपा ने बढ़ाई हलचल
सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने 2 अक्टूबर को कहा कि पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारेगी और उसके नाम पर फैसला किया जाएगा। उनके मुताबिक तीसरे उम्मीदवार का नामांकन 5 अक्टूबर तक कराया जा सकता है। इससे यह संभावना बढ़ी है कि यूपी की सभी 10 राज्यसभा सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन के बजाय कम से कम एक सीट के लिए मतदान हो सकता है।
हालांकि अंतिम तस्वीर नामांकन, नाम वापसी और उम्मीदवारों की संख्या स्पष्ट होने के बाद ही सामने आएगी। इसलिए फिलहाल 10 सीटों के पूरे चुनावी समीकरण को संभावित संख्या बल और उम्मीदवारों की स्थिति के आधार पर देखा जा रहा है।
यदि बीजेपी और सपा अपने-अपने सुरक्षित संख्या बल के आधार पर उम्मीदवारों को मैदान में उतारती हैं, तो सात सीटों पर बीजेपी और दो सीटों पर सपा की स्थिति मजबूत दिखाई देती है। ऐसे में 10वीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
राज्यसभा चुनाव में मतदान खुला मतपत्र प्रणाली के तहत होता है और पार्टी विधायकों की भूमिका के साथ-साथ सहयोगी दलों तथा निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी संख्या बल को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उम्मीदवारों के नामांकन और राजनीतिक समर्थन की अंतिम तस्वीर आने तक मुकाबले की स्थिति बदल सकती है।
नामांकन की अंतिम तस्वीर के बाद साफ होगा मुकाबला
अभी तक सपा के दो उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर चुके हैं और तीसरे उम्मीदवार को लेकर पार्टी की ओर से प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात कही गई है। बीजेपी ने भी अतिरिक्त नामांकन पत्र खरीदे हैं, हालांकि उसके सभी उम्मीदवारों के नाम सामने आना बाकी है।
अब नजर नामांकन की अंतिम तारीख, उम्मीदवारों की संख्या और नाम वापसी की प्रक्रिया पर है। यदि उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर रहती है तो निर्वाचन निर्विरोध हो सकता है, जबकि अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में रहने पर संबंधित सीटों के लिए मतदान होगा।