चंडीगढ़, 22 सितंबर 2026 । पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो रही हैं। इसी बीच आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच संभावित तालमेल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ गई है। एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पंजाब में कांग्रेस और AAP को साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। इसी चर्चा में पश्चिम बंगाल की नेता ममता बनर्जी के अरविंद केजरीवाल के संपर्क में होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन संभावित राजनीतिक समीकरणों पर दोनों दलों की ओर से किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा सामने नहीं आई है।
ममता बनर्जी के हश्र ने बढ़ाई चिंता
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का किला ढहने, बगावत में पार्टी के टूटने और अब पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह भी चला गया है। ममता बनर्जी की स्थिति को देखकर समाजवादी पार्टी बेहद सतर्क हैं। दावा किया जा रहा है कि बीजेपी के आक्रामक अभियान को देखते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को एक साथ लाने की कवायद अंदरखाने शुरू हो गई है। दावा यहां तक किया जा रहा है कि इस पूरी रणनीति में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव मध्यस्थ की सबसे अहम भूमिका में हैं। उनके रिश्ते राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल दोनों के साथ बेहतर हैं। चर्चा है कि पंजाब में दोनों दल साथ आते हैं तो इसका लाभ 2027 में गुजरात और गोवा में मिलेगा।
पंजाब उन राज्यों में शामिल है जहां कांग्रेस और AAP का सीधा राजनीतिक मुकाबला रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों दलों के बीच संभावित तालमेल की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि राज्य में दोनों की अलग-अलग राजनीतिक मौजूदगी है।
हिंदुस्तान टाइम्स की जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, AAP और कांग्रेस के बीच पंजाब में सीधा मुकाबला जारी है और AAP ने व्यापक विपक्षी गठबंधन के साथ नए राजनीतिक तालमेल से दूरी बनाए रखी थी। रिपोर्ट में AAP के कुछ नेताओं द्वारा कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को लेकर असहमति जताने का भी उल्लेख किया गया था।
अखिलेश यादव की भूमिका को लेकर क्या दावा
नवभारत टाइम्स की 22 सितंबर 2026 की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अखिलेश यादव कांग्रेस और AAP को करीब लाने की कोशिश में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अखिलेश यादव के कांग्रेस नेता राहुल गांधी और AAP के अरविंद केजरीवाल दोनों के साथ राजनीतिक संपर्क हैं और इसी वजह से उनके नाम को संभावित मध्यस्थ के तौर पर देखा जा रहा है। यह रिपोर्ट आधारित राजनीतिक चर्चा है, न कि किसी घोषित गठबंधन का आधिकारिक विवरण।
वहीं उत्तर प्रदेश में भी समाजवादी पार्टी और AAP के बीच राजनीतिक संपर्क को लेकर हाल के महीनों में चर्चा रही है। अगस्त 2026 में संजय सिंह और अखिलेश यादव की मुलाकात को लेकर NDTV ने संभावित SP-AAP समीकरण पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी।
ममता बनर्जी और केजरीवाल के बीच संपर्क की चर्चा
पंजाब के संभावित विपक्षी समीकरण की चर्चा में ममता बनर्जी का नाम भी सामने आया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ममता बनर्जी भी अरविंद केजरीवाल के संपर्क में हैं। हालांकि, इस संपर्क के आधार पर पंजाब में किसी औपचारिक गठबंधन या सीट-बंटवारे का निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगा।
हाल के दिनों में ममता बनर्जी को लेकर विपक्षी दलों की राजनीतिक गतिविधियां भी चर्चा में रही हैं। सितंबर 2026 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ममता बनर्जी से बातचीत कर समर्थन जताया था। यह घटनाक्रम विपक्षी दलों के बीच आपसी संवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे पंजाब में AAP-कांग्रेस गठबंधन की पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
पहले भी साथ आ चुके हैं कांग्रेस और AAP
कांग्रेस और AAP के बीच राजनीतिक तालमेल पूरी तरह नया नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, गोवा और चंडीगढ़ में सीट-बंटवारे के तहत साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया था। वहीं पंजाब में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनावी मैदान में थीं।
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में भी दोनों दलों के बीच तालमेल देखने को मिला था। इससे यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय या स्थानीय स्तर पर परिस्थितियों के अनुसार दोनों पार्टियां कुछ मुद्दों पर साथ आ चुकी हैं, हालांकि पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन एक अलग राजनीतिक फैसला होगा।
2027 चुनाव से पहले सीट बंटवारे पर नजर
अगर भविष्य में कांग्रेस और AAP के बीच पंजाब में किसी तरह के तालमेल पर सहमति बनती है, तो सीटों के बंटवारे का सवाल महत्वपूर्ण होगा। दोनों दलों का पंजाब में अपना संगठनात्मक आधार और राजनीतिक दावेदारी है। इसलिए संभावित गठबंधन की स्थिति में सीटों का वितरण, नेतृत्व और साझा चुनावी रणनीति जैसे मुद्दे बातचीत के केंद्र में रह सकते हैं।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में इस तरह की किसी अंतिम व्यवस्था की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए पंजाब की राजनीति में कांग्रेस-AAP गठजोड़ को अभी संभावित राजनीतिक समीकरण के तौर पर ही देखा जा रहा है।
विपक्षी एकता की बड़ी तस्वीर
पंजाब की चर्चा को विपक्षी दलों के व्यापक राजनीतिक समीकरण से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 2026 में विपक्षी दलों के बीच गठबंधन और आपसी समन्वय को लेकर कई स्तरों पर बातचीत और मतभेद दोनों सामने आए हैं। AAP ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन को लेकर अलग रुख अपनाया है, जबकि दूसरी ओर कुछ विपक्षी नेता विभिन्न राज्यों में तालमेल की संभावनाओं पर बातचीत करते रहे हैं।
ऐसे में पंजाब में AAP और कांग्रेस के बीच किसी संभावित समझौते पर अंतिम तस्वीर चुनाव के करीब आने और दोनों दलों की आधिकारिक बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की संभावित भूमिका को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने पंजाब के आगामी चुनावी समीकरणों पर चर्चा जरूर तेज कर दी है।