किम जोंग की बहन बोली- परमाणु हथियार छोड़ना बेवकूफी होगी

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नई दिल्ली, 17  सितंबर 2026।  उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की बहन और वरिष्ठ अधिकारी किम यो जोंग ने देश के परमाणु हथियारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार संपन्न देश के दर्जे को अपरिवर्तनीय बताया और परमाणु निरस्त्रीकरण की मांगों को खारिज किया। उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की बैठक में उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर हुई चर्चा के बाद सामने आया है।

उत्तर कोरिया ने एक बार फिर कहा है कि वह परमाणु हथियार छोड़ने वाला नहीं है।

किम जोंग उन की बहन किम यो-जोंग ने गुरुवार को कहा कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियार बनाए रखेगा। ये हथियार देश की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।

किम यो ने परमाणु हथियार छोड़ने के लिए मनाने की कोशिशों को ‘बेवकूफी भरी बात’ बताया।

किम यो-जोंग का यह बयान वियना में चल रही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की जनरल कॉन्फ्रेंस के दौरान आया।

परमाणु हथियार छोड़ने की मांग पर किम यो जोंग का जवाब

रॉयटर्स के मुताबिक किम यो जोंग ने IAEA की आम सभा में उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण पर हुई चर्चा को खारिज करते हुए कहा कि देश की परमाणु शक्ति के रूप में स्थिति को बदला नहीं जा सकता। उन्होंने इसे उत्तर कोरिया की स्थायी स्थिति बताया।

किम यो जोंग का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका, दक्षिण कोरिया और अन्य देश उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रम को लेकर लगातार चिंता जताते रहे हैं। प्योंगयांग लंबे समय से अपने परमाणु हथियारों को अपनी सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताता रहा है।

उत्तर कोरिया के अधिकारियों की ओर से हाल के दिनों में परमाणु नीति को लेकर लगातार बयान सामने आए हैं। 17 सितंबर को बीजिंग शियांगशान फोरम में उत्तर कोरिया के उप रक्षा मंत्री किम कांग इल ने भी कहा कि देश की परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र की स्थिति अपरिवर्तनीय है। उन्होंने अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बढ़ते सैन्य सहयोग का हवाला देते हुए परमाणु क्षमता को मजबूत करने की बात कही।

प्योंगयांग का कहना है कि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और कथित परमाणु दबाव के बीच उसकी परमाणु क्षमता सुरक्षा के लिए जरूरी है। हालांकि अमेरिका और उसके सहयोगी उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रम को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मानते हैं।

IAEA की चर्चा के बाद आया बयान

किम यो जोंग की टिप्पणी IAEA की उस चर्चा के बाद आई जिसमें उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और निरस्त्रीकरण को लेकर अंतरराष्ट्रीय रुख पर बात हुई। उन्होंने ऐसी मांगों को खारिज करते हुए कहा कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु दर्जे से पीछे नहीं हटेगा।

इस बयान से यह संकेत मिलता है कि प्योंगयांग फिलहाल परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव को स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है। उत्तर कोरिया ने पिछले कुछ वर्षों में अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को लगातार आगे बढ़ाया है।

मिसाइल परीक्षणों के बीच बढ़ा तनाव

परमाणु नीति पर ताजा बयानों के बीच उत्तर कोरिया ने हाल में कई सैन्य गतिविधियां भी की हैं। 11 सितंबर को उत्तर कोरिया ने पूर्वी तट से कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें समुद्र की ओर दागीं। इससे पहले अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान का संयुक्त सैन्य अभ्यास हुआ था, जिसे प्योंगयांग ने उकसावे वाली गतिविधि बताया था।

14 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार उत्तर कोरिया ने मिसाइल, तोपखाने और ड्रोन से जुड़े संयुक्त लाइव-फायर अभ्यास की भी जानकारी दी थी। दक्षिण कोरिया की सेना ने उस दौरान उत्तर कोरिया से कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण का पता लगाया था।

अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ तनाव के बीच बयान

उत्तर कोरिया लगातार अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सैन्य गतिविधियों की आलोचना करता रहा है। प्योंगयांग का दावा है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और अमेरिका-दक्षिण कोरिया-जापान के बीच बढ़ता सहयोग उसकी सुरक्षा के लिए खतरा है।

दूसरी ओर, अमेरिका और उसके सहयोगी इन सैन्य अभ्यासों को क्षेत्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारियों से जोड़ते हैं। इस तरह दोनों पक्षों की सुरक्षा संबंधी धारणाओं में बड़ा अंतर बना हुआ है।

आगे क्या होगा?

किम यो जोंग के ताजा बयान से उत्तर कोरिया की परमाणु नीति में तत्काल बदलाव के संकेत नहीं मिलते। इसके विपरीत, प्योंगयांग के हालिया बयानों में परमाणु हथियारों को अपनी सुरक्षा नीति का स्थायी हिस्सा बताया गया है। साथ ही उत्तर कोरिया के अधिकारियों ने परमाणु क्षमता को आगे मजबूत करने की बात भी दोहराई है।

हालांकि, भविष्य में अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच बातचीत की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। लेकिन परमाणु निरस्त्रीकरण पर प्योंगयांग की मौजूदा सार्वजनिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मांगों के बीच स्पष्ट मतभेद बना हुआ है।

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