अग्निपथ योजना के बाद सिख रेजिमेंट में क्यों घटा युवाओं का रुझान

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चंडीगढ़ , 12 सितंबर 2026। अग्निपथ योजना लागू होने के बाद सिख रेजिमेंट में भर्ती को लेकर युवाओं के रुझान में गिरावट देखने को मिली। इस स्थिति को देखते हुए सेना ने पंजाब में जागरूकता अभियान तेज किया है। सेना के अधिकारी खुद युवाओं के बीच पहुंचकर अग्निवीर भर्ती की प्रक्रिया, सैन्य सेवा के अवसर और इससे जुड़े लाभों की जानकारी दे रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस अभियान के बाद भर्ती में फिर से सुधार के संकेत मिले हैं।

जागरूकता के लिए आर्मी अफसर ग्राउंड पर उतरे

आर्मी अधिकारियों ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए सिख रेजिमेंटल सेंटर, सीनियर अधिकारियों, जमीनी स्तर की यूनिट्स और पूर्व सैनिकों ने मिलकर ठोस प्रयास किए। रेजिमेंट की टीमों ने भर्ती स्थलों का दौरा किया, गांव के सरपंचों को शामिल किया और स्थानीय लोगों से बातचीत करके उम्मीदवारों को प्रेरित किया और जागरूकता फैलाई।

अग्निपथ योजना के बाद बदली भर्ती की तस्वीर

अग्निपथ योजना वर्ष 2022 में शुरू की गई थी। इसके तहत युवाओं को सशस्त्र सेनाओं में अग्निवीर के रूप में भर्ती किया जाता है। सेना में जवानों की पारंपरिक भर्ती व्यवस्था से अलग इस योजना में शुरुआती सेवा अवधि सीमित होती है और चयनित अग्निवीरों के एक हिस्से को आगे नियमित सेवा में बनाए रखने का प्रावधान है।

योजना लागू होने के बाद पंजाब से सिख रेजिमेंट में भर्ती को लेकर अपेक्षित संख्या में उम्मीदवार नहीं पहुंचने की चिंता सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में भर्ती के आंकड़ों में सुधार हुआ और संबंधित स्तर पर यह आंकड़ा करीब 70 प्रतिशत तक पहुंचने की बात सामने आई है।

पंजाब में युवाओं के बीच पहुंचे सेना के अधिकारी

भर्ती में गिरावट के बाद सेना ने युवाओं के बीच सीधे जाकर जागरूकता बढ़ाने की रणनीति अपनाई। सेना के अधिकारियों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने युवाओं को अग्निपथ योजना की प्रक्रिया समझाई और सैन्य सेवा से जुड़े अवसरों के बारे में जानकारी दी।

इस अभियान का उद्देश्य युवाओं की आशंकाओं को दूर करना और उन्हें सेना में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। सेना की कोशिश है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी सही जानकारी युवाओं तक पहुंचे, ताकि गलत धारणाओं के कारण योग्य उम्मीदवार आवेदन से पीछे न हटें।

सिख रेजिमेंट का गौरवशाली इतिहास

सिख रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित रेजिमेंटों में से एक है। इसका इतिहास 1846 से जुड़ा है। इसके अलावा सिख लाइट इन्फैंट्री और पंजाब रेजिमेंट भी सेना की प्रमुख रेजिमेंटों में शामिल हैं।

इन रेजिमेंटों में पंजाब और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवा सैन्य सेवा में आते रहे हैं। इसलिए अग्निपथ योजना के बाद भर्ती के रुझान में बदलाव को सेना के लिए महत्वपूर्ण विषय माना गया।

सेना के लिए पर्याप्त संख्या में योग्य युवाओं की भर्ती बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए केवल भर्ती रैली आयोजित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं को योजना की पूरी जानकारी देना भी जरूरी है।

अधिकारियों की ओर से युवाओं को भर्ती की पात्रता, शारीरिक मानक, चयन प्रक्रिया और अग्निवीर के तौर पर मिलने वाले अवसरों के बारे में जानकारी दी जा रही है। इससे युवाओं को आवेदन से पहले अपनी तैयारी और संभावनाओं को समझने में मदद मिल सकती है।

अभियान का दिखने लगा असर

सेना के जागरूकता अभियान के बाद भर्ती में सकारात्मक बदलाव के संकेत मिले हैं। रिपोर्टों में बताया गया है कि 2025-26 में संबंधित भर्ती आंकड़ा करीब 70 प्रतिशत तक पहुंचा। इससे संकेत मिलता है कि युवाओं के बीच पहुंच बढ़ाने और भर्ती प्रक्रिया को लेकर जानकारी देने की कोशिश असरदार हो रही है।

हालांकि, सेना के सामने अब भी चुनौती यह है कि पंजाब के युवाओं में सैन्य सेवा को लेकर लगातार रुचि बनी रहे और पर्याप्त संख्या में योग्य उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में शामिल हों।

आगे भी जारी रह सकता है जागरूकता अभियान

सेना की ओर से युवाओं तक पहुंच बनाने की मुहिम आगे भी जारी रहने की संभावना है। इसका फोकस खास तौर पर उन क्षेत्रों पर हो सकता है जहां पारंपरिक रूप से सेना में भर्ती का मजबूत आधार रहा है।

अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं के बीच स्पष्टता बढ़ाने और सैन्य करियर के विकल्पों की जानकारी देने से भर्ती प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में आने वाले भर्ती चक्रों में पंजाब से सिख रेजिमेंट और अन्य रेजिमेंटों के लिए युवाओं की भागीदारी पर नजर रहेगी।

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