BJP के गढ़ में PK का नया दांव! कौन हैं डॉ. दिव्या ज्योति,

जिन्हें पटना शिक्षक सीट पर उतार सकता है जन सुराज

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पटना, 09 सितंबर2026 । बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के मजबूत किले को चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में डॉ. दिव्या ज्योति ने जन सुराज पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है और उनके नाम की चर्चा पटना शिक्षक सीट से संभावित उम्मीदवार के तौर पर तेज हो गई है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी औपचारिक रूप से उनकी उम्मीदवारी की घोषणा नहीं हुई है।

कौन हैं डॉ दिव्या ज्योति ?

पटना निवासी और मूल रूप से बाढ़ की रहने वाली डॉ दिव्या ज्योति चाणक्य कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज में असिस्टेंट प्रोफेसर और चाणक्य फाउंडेशन की सीईओ हैं। वो लंबे समय से बालिका शिक्षा, शिक्षकों के सम्मान और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के उत्थान के लिए कार्यरत हैं। पहले निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान करने वाली दिव्या ने महात्मा गांधी और डॉ भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों से प्रभावित होकर जन सुराज का चुनाव चिह्न ‘स्कूल बैग’ थाम लिया है।

जन सुराज में शामिल होने के बाद दिव्या ज्योति ने कहा कि वह महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों के साथ सामाजिक न्याय और शिक्षा के मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए काम करती रही हैं। उन्होंने प्रशांत किशोर की विचारधारा से प्रभावित होकर जन सुराज से जुड़ने की बात कही है।

चुनाव लड़ने पर क्या बोलीं दिव्या ज्योति?

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार बनाए जाने के सवाल पर दिव्या ज्योति ने फिलहाल पार्टी नेतृत्व के फैसले को प्राथमिकता दी है। उनका कहना है कि प्रशांत किशोर और जन सुराज के शीर्ष नेतृत्व की ओर से जो निर्देश मिलेगा, वह उसके अनुसार काम करेंगी। इसलिए फिलहाल उनकी उम्मीदवारी को संभावित उम्मीदवार के तौर पर ही देखा जा रहा है।

हालांकि जन सुराज में उनकी एंट्री और पटना शिक्षक सीट पर उनकी पुरानी चुनावी तैयारी को देखते हुए उनके नाम को लेकर अटकलें तेज हैं। पार्टी ने बिहार विधान परिषद की आगामी आठ सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी की है और उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया पर भी काम किया जा रहा है।

पटना शिक्षक सीट पर क्यों महत्वपूर्ण है दिव्या ज्योति का नाम?

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र लंबे समय से बीजेपी के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है। बीजेपी के नवल किशोर यादव वर्ष 1996 से लगातार इस सीट पर जीत दर्ज करते आए हैं। ऐसे में अगर जन सुराज दिव्या ज्योति को मैदान में उतारती है तो मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है।

दिव्या ज्योति पहले से इस सीट के मतदाताओं के बीच अपनी पहचान बनाने की कोशिश करती रही हैं। ऐसे में जन सुराज का संगठन और प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति उनके पुराने जनसंपर्क को नया राजनीतिक आधार दे सकती है।

प्रशांत किशोर का BJP के गढ़ पर फोकस

प्रशांत किशोर की रणनीति इस बार बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर मजबूत चुनौती पेश करने की है। जन सुराज ने इन सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी की है और पार्टी कार्यकर्ताओं से संभावित उम्मीदवारों के नाम पर सुझाव भी लिए गए हैं।

पटना शिक्षक सीट इस रणनीति में इसलिए खास हो सकती है क्योंकि यहां लंबे समय से बीजेपी का दबदबा रहा है। जन सुराज के सामने चुनौती सिर्फ उम्मीदवार खड़ा करने की नहीं, बल्कि शिक्षक मतदाताओं के बीच संगठन और भरोसा बनाने की भी होगी।

शिक्षक मतदाताओं के मुद्दे बनेंगे चुनावी हथियार?

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में सामान्य विधानसभा चुनावों की तरह हर मतदाता मतदान नहीं करता। यहां पात्र शिक्षक मतदाताओं की भूमिका अहम होती है। यही वजह है कि शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की सेवा शर्तें, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सरकारी स्कूलों की स्थिति जैसे मुद्दे चुनावी बहस का हिस्सा बन सकते हैं।

जन सुराज भी आगामी विधान परिषद चुनाव को शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों से जोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची को लेकर भी चुनाव आयोग के सामने पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया की मांग उठाई है।

नवल किशोर यादव के सामने होगी बड़ी चुनौती

अगर जन सुराज की ओर से दिव्या ज्योति को आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार बनाया जाता है, तो उनका सीधा मुकाबला लंबे समय से इस सीट पर प्रभाव रखने वाले बीजेपी नेता नवल किशोर यादव से हो सकता है। इसके अलावा दूसरे राजनीतिक दल भी अपने उम्मीदवार उतारेंगे, जिससे मुकाबला बहुकोणीय होने की संभावना है।

दिव्या ज्योति की पिछली चुनावी तैयारी और शिक्षक मतदाताओं के बीच उनकी मौजूदगी को जन सुराज अपने पक्ष में इस्तेमाल कर सकती है। वहीं नवल किशोर यादव का वर्षों का राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक आधार बीजेपी के लिए बड़ा फायदा होगा।

अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डॉ. दिव्या ज्योति का जन सुराज में शामिल होना सामने आ चुका है, लेकिन पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उनकी अंतिम उम्मीदवारी की औपचारिक घोषणा का इंतजार है। पार्टी के उम्मीदवारों की अंतिम सूची सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

अगर दिव्या ज्योति को टिकट मिलता है तो पटना शिक्षक सीट बिहार एमएलसी चुनाव की सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो सकती है। एक तरफ करीब तीन दशक से बीजेपी का प्रभाव, दूसरी तरफ जन सुराज का नया राजनीतिक प्रयोग और तीसरी ओर अन्य दलों की चुनौती—इन सबके बीच शिक्षक मतदाताओं का फैसला बेहद अहम रहने वाला है।

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