खरगे की रैली के बाद ‘शुद्धीकरण’ विवाद में बड़ा एक्शन

अंजू की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR

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हल्द्वानी, 09 सितंबर2026 । उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान में कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धीकरण’ को लेकर चल रहे विवाद में आखिरकार पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। हल्द्वानी कोतवाली में अधिवक्ता और कांग्रेस कार्यकर्ता अंजू की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और घटना में शामिल लोगों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।

शिकायत में अंजू ने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर एडिटेड विडियो प्रसारित किया गया। इसमें भ्रामक शब्द जोड़कर एक विशेष धर्म और जाति को निशाना बनाने का प्रयास किया गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर बीएनएस की धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता या नफरत फैलाना), 299 (जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और अपमान करना) और एससी/एसटी ऐक्ट की धारा 3(1) (R) के तहत केस दर्ज किया है। जांच एसपी क्राइम डॉ. जगदीश चंद्र करेंगे।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?

पुलिस के मुताबिक FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 और 299 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) के तहत दर्ज की गई है। मामले की जांच पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है।

इन धाराओं को देखते हुए पुलिस जांच का फोकस कथित घटना के सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर भी रहेगा। हालांकि FIR में फिलहाल किसी व्यक्ति का नाम नहीं है और मामला अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है।

क्या है पूरा ‘शुद्धीकरण’ विवाद?

मल्लिकार्जुन खरगे ने अगस्त में हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया था। आरोप है कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कुछ लोगों ने वहां धार्मिक अनुष्ठान कर कथित तौर पर ‘शुद्धीकरण’ किया। इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।

कांग्रेस और उससे जुड़े संगठनों ने इसे दलित समुदाय का अपमान बताते हुए कार्रवाई की मांग की। दूसरी ओर, इस घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अनुष्ठान किसने कराया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

अंजू ने पहले भी उठाई थी कार्रवाई की मांग

अधिवक्ता अंजू ने इस मामले में 15 अगस्त को पुलिस को शिकायत दी थी। कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने हल्द्वानी कोतवाली में धरना भी दिया था। इसके बाद मामला लगातार राजनीतिक और सामाजिक चर्चा में बना रहा।

अब पुलिस ने उनकी शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर दी है। इससे इस विवाद में पहली औपचारिक आपराधिक जांच शुरू हो गई है।

80 से ज्यादा शिकायतें, फिर दर्ज हुई FIR

इस मामले को लेकर उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में शिकायतें और ज्ञापन दिए गए थे। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस को 80 से ज्यादा शिकायतें मिली थीं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और दलित संगठनों ने कई स्थानों पर प्रदर्शन कर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।

करीब 28 दिनों तक विवाद और विरोध-प्रदर्शन के बाद हल्द्वानी में अंजू की शिकायत पर FIR दर्ज होने से मामले ने नया मोड़ लिया है। अब पुलिस जांच के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश करेगी कि कथित शुद्धीकरण में वास्तव में कौन लोग शामिल थे।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे इस मुद्दे को राज्यसभा में भी उठा चुके हैं। उन्होंने पहले बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि घटना के कई दिन बाद भी FIR दर्ज नहीं की गई। खरगे ने मामले में कार्रवाई की मांग की थी।

अब FIR दर्ज होने के बाद कांग्रेस की ओर से इसे कानून के स्तर पर आगे बढ़ा कदम माना जा रहा है। वहीं पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपों की जांच कर कथित घटना में शामिल लोगों की पहचान करना होगी।

राजनीतिक विवाद भी हुआ तेज

हल्द्वानी का यह मामला केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा है। घटना के बाद कांग्रेस ने इसे दलित सम्मान और सामाजिक भेदभाव से जोड़कर बीजेपी पर निशाना साधा, जबकि बीजेपी ने इस मामले में अपनी भूमिका से जुड़े आरोपों को खारिज किया है। विवाद के बीच दोनों दलों की ओर से बयानबाजी भी हुई।

FIR दर्ज होने के बाद अब राजनीतिक आरोपों से ज्यादा नजर पुलिस जांच पर रहेगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही यह तय होगा कि कथित घटना के लिए कौन जिम्मेदार था और उसके खिलाफ आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।

अब पुलिस जांच में क्या होगा?

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस कथित कार्यक्रम से जुड़े वीडियो, तस्वीरों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर सकती है। साथ ही मौके पर मौजूद लोगों और घटना से जुड़े संभावित गवाहों से पूछताछ की जा सकती है।

फिलहाल मुकदमा अज्ञात लोगों के खिलाफ है। इसलिए जांच का अगला अहम चरण आरोपियों की पहचान करना और कथित ‘शुद्धीकरण’ कार्यक्रम के आयोजन तथा उसमें शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि करना होगा।

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