उत्तरकाशी की सिल्क्यारा टनल में फिर लैंडस्लाइड, तीन लूज प्वाइंट बने चुनौती; यहीं 41 मजदूर 17 दिन फंसे थे

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उत्तरकाशी , 25 अगस्त 2026 । उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित सिल्क्यारा टनल में लैंडस्लाइड की घटना ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। टनल में मौजूद तीन लूज प्वाइंट को सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चुनौती माना जा रहा है। यही वही क्षेत्र है जहां नवंबर 2023 में निर्माणाधीन सुरंग का हिस्सा ढहने के बाद 41 मजदूर 17 दिनों तक अंदर फंसे रहे थे।

उत्तरकाशी में निर्माणाधीन 4.5 किलोमीटर लंबी सिल्क्यारा टनल में लैंडस्लाइड होने का मामला सामने आया है। जिसके बाद एक बार फिर श्रमिकों और टनल की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी बीच सुरंग के भीतर भारी मलबा गिरने का वीडियो सामने आया है। हालांकि निर्माण कंपनी का दावा है कि वीडियो कुछ दिन पुराना है और बड़कोट साइड से करीब 1300 मीटर वाले लूज हिस्से का हैं जहां पर काम चल रहा है।

टनल में 3 लूज हिस्से चिह्नित

नवयुवा प्रोजेक्ट मैनेजर श्रीराम ने बताया कि टनल में 3 लूज हिस्से चिह्नित किए गए थे जिसमें सिल्क्यारा की तरफ से 112 मीटर तथा बड़कोट की तरफ से 700 और 1300 मीटर पर लूज प्वाइंट चिह्नित किए गए थे। सिल्क्यारा 112 और बड़कोट 700 मीटर वाले हिस्सों में रॉक बोल्ट, ग्राउट और सीमेंट ग्राउटिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है। वहीं 1300 मीटर वाले हिस्से में सुरक्षात्मक और रेक्टिफिकेशन का कार्य जारी है। निर्माण कंपनी ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए किसी बड़े खतरे की आशंका से इनकार किया है।

ताजा घटना के बाद टनल की सुरक्षा और निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पहाड़ी क्षेत्र की कमजोर भूगर्भीय संरचना के कारण यहां भूस्खलन और चट्टानों के खिसकने का खतरा बना रहता है। ऐसे में सुरंग के भीतर और आसपास के संवेदनशील हिस्सों की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

सिल्क्यारा टनल हादसा देश के सबसे चर्चित रेस्क्यू ऑपरेशनों में शामिल रहा था। 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए करीब 17 दिनों तक लगातार अभियान चलाया गया था। उस दौरान रेस्क्यू टीमों को चट्टानों, मलबे और सुरंग की संरचना से जुड़ी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

अब तीन लूज प्वाइंट सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों और तकनीकी टीमों के लिए चुनौती बढ़ गई है। इन स्थानों की स्थिरता की जांच करना और जरूरत के मुताबिक सुरक्षा उपाय करना जरूरी होगा, ताकि किसी बड़े हादसे की आशंका को कम किया जा सके।

सिल्क्यारा टनल उत्तराखंड की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल है। इसलिए यहां निर्माण और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों की निगरानी में भूगर्भीय स्थिति का आकलन और संवेदनशील हिस्सों को सुरक्षित करना प्राथमिकता होगी।

2023 के हादसे की यादें ताजा होने के कारण ताजा लैंडस्लाइड ने स्थानीय लोगों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अब निगाह इस बात पर है कि तीनों लूज प्वाइंट को सुरक्षित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं और टनल में काम किस तरह आगे बढ़ता है।

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