नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026 । दिल्ली में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने एक रिटायर्ड कर्नल को फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर कॉल किया और उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 15.50 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर पुलिस ने मामले की जांच करते हुए पंजाब और राजस्थान से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताकर रिटायर्ड कर्नल को कथित जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाया। इसके बाद उन्हें लगातार दबाव में रखा गया और बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। ठगी की रकम लुधियाना स्थित एक बैंक खाते में पहुंची।
पुलिस अधिकारी बनकर कर ली ठगी
वहां एक शख्स ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल मुंबई में अवैध बैंक अकाउंट खोलने और खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, निवेश, धोखाधड़ी और आतंकी फंडिंग में होने की बात कही गई। ठगों ने फर्जी ईडी गिरफ्तारी वारंट, कोर्ट दस्तावेज समेत कई कागज भेजे। इसके बाद कर्नल और उनकी पत्नी को डिजिटल अरेस्ट करने की बात कहकर दबाव बनाया गया। आरबीआई के कथित निर्देशों का हवाला देकर 15.50 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। 19 अप्रैल को साइबर थाने में ई-एफआईआर दर्ज हुई।
जांच में पुलिस को कथित तौर पर सरबजीत, सूरज, संदीप और नरेश उर्फ लकी की भूमिका मिली। पुलिस के अनुसार, आरोपी बैंक खाते उपलब्ध कराने और उन्हें आगे साइबर ठगी करने वाले नेटवर्क तक पहुंचाने का काम करते थे। नरेश की भूमिका घरेलू स्तर पर खाते उपलब्ध कराने वालों और कंबोडिया तथा दुबई से जुड़े कथित साइबर अपराधियों के बीच कड़ी के रूप में सामने आई है।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि जिस बैंक खाते में रिटायर्ड कर्नल से ठगी की रकम पहुंची, उससे जुड़ी 17 साइबर अपराध शिकायतें दर्ज थीं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपियों का नेटवर्क कितना बड़ा है और इस तरह के कितने अन्य मामलों में उनकी भूमिका रही है।
इस मामले में चार मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड भी बरामद किए गए हैं। पुलिस डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग लेनदेन की जांच के जरिए नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की रकम के पूरे प्रवाह का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
यह मामला एक बार फिर बताता है कि साइबर ठग पुलिस, CBI, ED या अन्य जांच एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को डराते हैं। किसी भी फोन कॉल पर गिरफ्तारी या जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के बजाय संबंधित एजेंसी से स्वतंत्र रूप से संपर्क करना जरूरी है।