5 मीटर दूर अंधेरे में पैरों पर सटीक गोली कैसे लगी?
हाईकोर्ट के आदेश पर CBI कराएगी SO का निशानेबाजी टेस्ट
लखनऊ, 20 अगस्त 2026 । एक चर्चित गोलीकांड की जांच में अब नया मोड़ आ गया है। घटना के दौरान अंधेरे में करीब 15 मीटर की दूरी से पैरों पर सटीक गोली लगने को लेकर उठे सवालों के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर CBI संबंधित SO का निशानेबाजी परीक्षण कराने जा रही है। इस टेस्ट का मकसद यह पता लगाना है कि बताई गई परिस्थितियों में अधिकारी के लिए इतनी सटीक फायरिंग करना व्यावहारिक रूप से संभव था या नहीं।
पुलिस की एफआईआर में कई विरोधाभास
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ की जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने आरोपी छोटकऊ उर्फ अलाउद्दीन की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को जांच का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि पुलिस की एफआईआर में कई विरोधाभास साफ नजर आ रहे हैं और प्रतीत होता है कि थानाध्यक्ष ने घटना का झूठा ब्यौरा पेश किया है। इसलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। कोर्ट ने सीबीआई को तीन महीने में अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा अदालत ने श्रावस्ती सत्र न्यायालय में अलाउद्दीन के खिलाफ चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
मामले में सबसे अहम सवाल घटना की परिस्थितियों को लेकर है। बताया गया कि अंधेरे के बीच करीब 15 मीटर की दूरी से गोली चलाई गई और निशाना पैरों पर लगा। इसी दावे की व्यवहारिकता पर सवाल उठने के बाद अदालत ने जांच को और वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। अब CBI मौके की परिस्थितियों को दोहराकर यह समझने की कोशिश करेगी कि ऐसी स्थिति में प्रशिक्षित निशानेबाज कितनी सटीक फायरिंग कर सकता है।
निशानेबाजी टेस्ट के दौरान घटना से जुड़ी परिस्थितियों को यथासंभव दोहराया जा सकता है। दूरी, रोशनी की स्थिति, लक्ष्य की स्थिति और हथियार से जुड़ी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर परीक्षण किया जाएगा। इससे जांच एजेंसी को घटनाक्रम के अलग-अलग दावों की वैज्ञानिक जांच करने में मदद मिल सकती है।
इस टेस्ट का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि गोलीकांड में फायरिंग की दिशा, दूरी और निशाने की सटीकता जैसे तकनीकी पहलू मामले की कहानी को समझने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। CBI परीक्षण के नतीजों को अन्य फोरेंसिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर देखेगी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद होने वाला यह परीक्षण जांच की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, केवल निशानेबाजी टेस्ट के परिणाम से पूरे मामले का निष्कर्ष तय नहीं होगा। जांच एजेंसी को घटनास्थल के साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट, बैलिस्टिक रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध सबूतों के साथ इसकी समीक्षा करनी होगी।
अब सभी की नजर CBI के निशानेबाजी परीक्षण और उसके निष्कर्षों पर है। अगर परीक्षण में सामने आता है कि बताई गई रोशनी और दूरी में पैरों पर इतना सटीक निशाना लगाना संभव था, तो यह जांच के एक पहलू को मजबूत कर सकता है। वहीं, विपरीत नतीजा सामने आने पर घटना के दावे और परिस्थितियों पर नए सवाल खड़े हो सकते हैं।