देहरादून, 20 अगस्त 2026 । अंकिता भंडारी केस में आरोपियों को एक बार फिर राहत नहीं मिल सकी। अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया। मामले में सरकार की ओर से की गई पैरवी को अहम माना जा रहा है। सरकार ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने मजबूती से अपना पक्ष रखा और गंभीर आरोपों को देखते हुए जमानत का विरोध किया गया।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में आज एक बार फिर सभी आरोपियों की जमानत याचिका कोर्ट से खारिज कर दी गई। सरकार की ओर से की गई मजबूत और प्रभावी पैरवी के चलते आरोपियों को कोई राहत नहीं मिल सकी है। यह एक बार फिर स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बेटी अंकिता को न्याय दिलाने और दोषियों को कानून के तहत कठोरतम सजा सुनिश्चित करने के लिए पूरी मजबूती से खड़ी है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलने को लेकर सरकार का अपना दावा है। पुष्कर सिंह धामी सरकार ने इस संवेदनशील प्रकरण में पहले दिन से लेकर न्यायालय के अंतिम फैसले तक अपराधियों को कठोर सजा दिलाने के लिए पूरी गंभीरता और मजबूती से कार्य किया।
सरकार ने आरोपियों को जमानत नहीं मिलने को अपनी प्रभावी कानूनी पैरवी का परिणाम बताया है। सरकार का कहना है कि मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जरूरी तथ्यों और साक्ष्यों को मजबूती से अदालत के सामने रखा जा रहा है, ताकि गंभीर अपराध के आरोपों वाले इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया प्रभावी तरीके से आगे बढ़ सके।
मामले में जमानत याचिका खारिज या लंबित रहने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहरा दिया है। अंतिम दोषसिद्धि या बरी होने का फैसला मुकदमे की पूरी सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत द्वारा किया जाएगा।
अंकिता भंडारी केस में पीड़ित परिवार और आम लोगों की नजर लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया पर बनी हुई है। अब जमानत से जुड़ी ताजा कार्यवाही के बाद मामले की आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। सरकार की ओर से भी संकेत दिया गया है कि वह मामले में आगे भी प्रभावी पैरवी जारी रखेगी।