नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026 । एफएमसीजी कंपनी डाबर ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। कंपनी की ओर से नियामक की कुछ प्रक्रियाओं और कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस विवाद के बीच खाद्य उत्पादों की मंजूरी, नियामकीय अनुपालन और कंपनियों के लिए लागू मानकों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
एफएमसीजी कंपनी डाबर ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने FSSAI पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है।
इसके अलावा कंपनी ने FSSAI पर कॉम्पिटिटर्स में शामिल अन्य मैन्युफैक्चरर्स के कॉमर्शियल हितों को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया।
डाबर का दावा है कि प्रोडक्ट्स पर 100% दावे के इस्तेमाल को तुरंत बैन करने के आदेश से उसकी 150 करोड़ रुपए की वैल्यू की इन्वेंट्री यानी माल नष्ट होने के जोखिम में आ गया था।
6 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में डाबर ने FSSAI के इस आदेश को बिना सोच-समझकर जारी किया गया और एकतरफा बताया है।
FSSAI की भूमिका पर नजर
FSSAI देश में खाद्य उत्पादों की सुरक्षा और मानकों से जुड़े नियम तय करने और उनके अनुपालन की निगरानी करने वाली प्रमुख संस्था है। ऐसे में किसी बड़ी एफएमसीजी कंपनी की ओर से भेदभाव का आरोप लगाए जाने के बाद नियामकीय प्रक्रिया पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
उपभोक्ताओं और कंपनियों के लिए क्यों अहम है मामला?
खाद्य उत्पादों से जुड़े नियम सीधे उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े होते हैं। कंपनियों के लिए भी स्पष्ट और समान नियम जरूरी हैं, ताकि उत्पादों की मंजूरी, लेबलिंग और बाजार में बिक्री से संबंधित प्रक्रियाओं में अनिश्चितता न रहे। डाबर और FSSAI के बीच उठे विवाद का असर इसी व्यापक नियामकीय बहस पर पड़ सकता है।
अब आगे क्या?
डाबर के आरोपों के बाद निगाहें FSSAI के रुख पर हैं। यदि नियामक की ओर से कोई स्पष्टीकरण या जवाब सामने आता है, तो विवाद की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल मामला खाद्य क्षेत्र में नियामकीय पारदर्शिता और समान व्यवहार की बहस को सामने ला रहा है।