नई दिल्ली, 05 अगस्त 2026 । देशभर में संसद और विभिन्न राज्य विधानसभाओं की रिक्त सीटों पर उपचुनाव कराने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। यह मामला उन सीटों से जुड़ा है, जो सांसदों या विधायकों के इस्तीफे, निधन, अयोग्यता या अन्य कारणों से खाली हुई हैं। याचिका में समयबद्ध तरीके से उपचुनाव कराने और संवैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
- आरोप लगाया गया है कि आयोग उपचुनाव कराने के मामलों में चुनिंदा रवैया अपनाता है और अलग-अलग सीटों पर अलग मानदंड लागू करता है।
- जस्टिस विक्रम नाथ की अगुआई वाली बेंच इस मामले में दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
- इनमें एक याचिका चुनाव आयोग की ओर से दायर की गई है, जिसमें दिसंबर 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती दी गई है।
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को पुणे लोकसभा सीट पर तत्काल उपचुनाव कराने का निर्देश दिया था।
- यह सीट मार्च 2023 में तत्कालीन सांसद के निधन के बाद रिक्त हुई थी।
- हाई कोर्ट ने कहा था कि किसी भी संसदीय लोकतंत्र में जनता का प्रतिनिधित्व निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के माध्यम से होता है और किसी निर्वाचन क्षेत्र को लंबे समय तक बिना प्रतिनिधि के नहीं छोड़ा जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह दलील रखी जा सकती है कि लंबे समय तक सीटों के खाली रहने से संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं का प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है। वहीं, दूसरी ओर चुनाव कराने वाली एजेंसियां सुरक्षा व्यवस्था, मतदाता सूची, मौसम, कानून-व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक कारणों का भी हवाला दे सकती हैं। इन सभी पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट विचार कर सकता है।
भारतीय चुनाव व्यवस्था के तहत सामान्य परिस्थितियों में किसी सीट के रिक्त होने पर निर्धारित समयसीमा के भीतर उपचुनाव कराने का प्रावधान है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में चुनाव कार्यक्रम तय करने का निर्णय चुनाव आयोग उपलब्ध परिस्थितियों, प्रशासनिक तैयारियों और अन्य कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखकर लेता है। इसी प्रक्रिया और उसके अनुपालन को लेकर अदालत में कानूनी बहस होने की संभावना है।
राजनीतिक दलों और मतदाताओं की नजर इस सुनवाई पर टिकी हुई है, क्योंकि अदालत की टिप्पणी या निर्देश भविष्य में रिक्त सीटों पर उपचुनाव कराने की प्रक्रिया और समय-सीमा को लेकर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। फिलहाल सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे का फैसला सुनाएगा।