तीन नए वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और आधुनिक नहर प्रणाली से मजबूत होगी दिल्ली की जल आपूर्ति

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नई दिल्ली, 01 अगस्त 2026 । दिल्ली में बढ़ती आबादी और स्वच्छ पेयजल की मांग को देखते हुए जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। दिल्ली जल बोर्ड की योजना के तहत राजधानी में तीन नए वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे। साथ ही नहरों में होने वाले पानी के रिसाव को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा, जिससे लाखों लीटर पानी की बर्बादी पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

हरियाणा सरकार करेगी पाइपलाइन बिछाने का काम

पाइपलाइन बिछाने का काम हरियाणा सरकार करेगी जबकि पैसे का भुगतान दिल्ली सरकार करेगी। इस प्रोजेक्ट पर कुल 7,000 करोड़ रुपये खर्च का एस्टिमेट तैयार किया गया है। पाइपलाइन का रूट मैप तैयार करने व अन्य चीजों का पता लगाने के लिए सरकार IIT रुड़की से प्रोजेक्ट का फिजिबिलिटी स्टडी कराएगी।

क्या है पाइपलाइन बिछाने का मकसद

तीनों प्लांट के निर्माण में तीन साल का वक्त लगेगा और प्लांट से करीब 235 एमजीडी पानी सप्लाई होगा। इन तीनों प्लांटों के लिए जल बोर्ड को तब पानी की जरूरत होगी। इसके लिए सरकार ने हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से दिल्ली तक करीब 102 किमी लंबा पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने की योजना बनाई है। पाइपलाइन बिछाने का मकसद यह है कि जितना पानी डैम से दिल्ली के लिए मिले, उसमें से थोड़ा भी पानी का नुकसान न हो।

नई परियोजना का उद्देश्य जल शोधन क्षमता बढ़ाने, पानी की गुणवत्ता में सुधार करने और राजधानी के विभिन्न इलाकों तक नियमित एवं पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित करना है। वर्तमान में कई स्थानों पर पुरानी नहरों और जल वितरण प्रणाली में रिसाव के कारण बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ हो जाता है। नई व्यवस्था लागू होने से इन समस्याओं में कमी आएगी और जल वितरण अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनेगा।

दिल्ली जल बोर्ड का मानना है कि नए वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट शुरू होने के बाद भविष्य की जल जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा। इससे उन क्षेत्रों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जहां गर्मियों के दौरान पानी की कमी और अनियमित आपूर्ति की शिकायतें सामने आती हैं। आधुनिक जल शोधन तकनीक के उपयोग से पेयजल की गुणवत्ता में भी सुधार होगा और जलजनित बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा नहरों की मरम्मत, लाइनिंग और रिसाव रोकने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इससे पानी का संरक्षण होगा, वितरण नेटवर्क की कार्यक्षमता बढ़ेगी और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना समयबद्ध तरीके से पूरी होती है, तो दिल्ली की जलापूर्ति व्यवस्था अधिक टिकाऊ, आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बन सकेगी।

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