पटना , 01 अगस्त 2026 । बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। चुनावी रणनीतियों के बीच अब चर्चा इस बात की है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रणनीतिकार सीट पर बदलते समीकरणों को देखते हुए अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष की सक्रियता और तेजस्वी यादव तथा तेज प्रताप यादव की चुनावी मौजूदगी ने मुकाबले को पहले की तुलना में अधिक दिलचस्प बना दिया है।
क्या महागठबंधन ने दिया जन सुराज को ‘गुप्त’ समर्थन?
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में हुई कम वोटिंग बीजेपी के लिए भी खतरे की घंटी की तरह है। वो भी तब, जब पिछले कई दशक से बीजेपी का इस सीट पर कब्जा रहा है। हालांकि, बांकीपुर पहले भी कम पोलिंग के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन इस बार कुछ माह पहले जब वर्ष 2025 में चुनाव हुए तो 41.32 और जुलाई 2026 में हुए चुनाव में लगभग सात प्रतिशत वोटिंग में हुई कमी ने संशय के बीज बो डाले। इसका असर देखिए कि वोटिंग के एक दिन बाद बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने राजद, कांग्रेस और वाम दलों पर ये आरोप लगाया कि इनकी तरफ से जन सुराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर को गुप्त समर्थन किया। चुनाव के दौरान हमने खुद देखा था कि राजद का पोलिंग एजेंट वोट देने आए लोगों से कह रहा था कि ‘इन्हें’ नहीं बल्कि ‘उन्हें’ वोट दें। वे (तेजस्वी यादव) पूरे प्रचार के दौरान गायब रहे और चुनाव से कुछ दिन पहले जब आए तो सिर्फ बीजेपी नेताओं पर ही प्रहार किया। कभी भी प्रशांत किशोर का विरोध नहीं किया। वहीं, प्रशांत किशोर ने भी कभी राजद नेताओं पर प्रहार किया।
बताया जा रहा है कि महागठबंधन इस सीट पर सामाजिक समीकरणों, स्थानीय मुद्दों और संगठनात्मक मजबूती के सहारे चुनावी बढ़त बनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं BJP अपने पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट रखने के साथ विकास कार्यों और संगठन की ताकत के दम पर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। ऐसे में दोनों दलों के बीच प्रचार अभियान और जनसंपर्क गतिविधियां तेज हो गई हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, बांकीपुर का चुनाव केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे बिहार की आगामी राजनीति और प्रमुख दलों की रणनीतिक ताकत की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। इसलिए सभी दल अपने-अपने नेताओं, कार्यकर्ताओं और चुनावी प्रबंधन को सक्रिय करने में जुटे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दों के साथ रोजगार, विकास, कानून-व्यवस्था और बुनियादी सुविधाएं भी प्रमुख विषय बने हुए हैं।
हालांकि, चुनाव परिणाम किसके पक्ष में जाएगा, इसका फैसला मतदाता करेंगे। फिलहाल सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने दावों के साथ चुनावी मैदान में सक्रिय हैं और बांकीपुर का उपचुनाव बिहार की राजनीति का प्रमुख केंद्र बन गया है।