नई दिल्ली, 01 अगस्त 2026 । देश में एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) कार्यक्रम को बढ़ावा देने के साथ ईंधन क्षेत्र में लागत कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की जा रही है। सरकार के अनुसार, एथेनॉल के उपयोग से पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब 30 रुपये तक की बचत का लाभ मिलने का दावा किया गया है। इसका उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है।
शुक्रवार को पेट्रोलियम मंत्रालय ने एथेनॉल प्रोग्राम की लागत, खाद्य सुरक्षा पर असर और टैक्सपेयर्स की सब्सिडी से जुड़े दावों का जवाब देते हुए यह बात कही। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि संकट के समय पर इस प्रोग्राम की वजह से पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 30 रुपए की बचत हुई।
दिल्ली में अभी 102 रुपए लीटर है E20 पेट्रोल
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक बाजार में क्रूड की कीमतें बढ़ने के बावजूद देश में उपभोक्ताओं को पेट्रोल 94.77 रुपए प्रति लीटर के भाव पर मिला।
इसका कारण यह था कि पूर्व-निर्धारित कीमतों पर घरेलू स्तर पर खरीदे गए एथेनॉल की हर एक लीटर पेट्रोल में 20% हिस्सेदारी थी। इसी वजह से रिटेल कीमतें क्रूड के तेज उछाल से बची रहीं।
28 फरवरी को पश्चिमी एशिया में तनाव और संघर्ष शुरू होने के बाद, सरकार ने करीब 75 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा था। इसके बाद मई में दामों में 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।
एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में निर्धारित अनुपात में मिलाने से न केवल ईंधन की लागत कम करने में मदद मिलती है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आती है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी बढ़ते हैं, क्योंकि एथेनॉल उत्पादन के लिए कृषि आधारित कच्चे माल की मांग में वृद्धि होती है।
सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश का आयात बिल घटाने, घरेलू जैव-ईंधन उद्योग को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद मिल रही है। इसके अलावा, जैव ईंधन के बढ़ते उपयोग से हरित ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में भी सहयोग मिल रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण का दीर्घकालिक लाभ केवल ईंधन लागत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा विविधीकरण, पर्यावरण संरक्षण और कृषि क्षेत्र के विकास से भी जुड़ा हुआ है। भविष्य में एथेनॉल उत्पादन क्षमता और मिश्रण प्रतिशत बढ़ने के साथ इस कार्यक्रम का आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव और अधिक व्यापक हो सकता है।