आरा, 31 जुलाई 2026 । भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एसटीएफ (STF) के जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर आरोप है कि भरत तिवारी के कथित रूप से आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने के बाद भी उन्हें गोली मारी गई। इस मामले ने पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर की वैधता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों से सीएम सम्राट ने की थी मुलाकात
इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी तेजी से बदलाव देखने को मिले। हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भरत तिवारी के पीड़ित परिजनों को पटना बुलाकर उनसे मुलाकात की थी। एनकाउंटर के समय जगदीशपुर के एसडीपीओ रहे राजेश कुमार शर्मा को, जिन्हें हाल ही में मद्य निषेध विभाग में डीएसपी बनाया गया था, वापस पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया। जगदीशपुर के एसडीओ संजीत कुमार को भी पद से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग में भेज दिया गया है, क्योंकि इस मामले में उनकी भूमिका भी संदिग्ध मानी गई थी।
जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर कार्रवाई की गई। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के बाद पर्याप्त आधार मिलने पर आरोपी जवान को गिरफ्तार किया गया। अब उससे पूछताछ की जा रही है और घटनाक्रम के सभी पहलुओं की जांच जारी है। मामले में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
आरोप है कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताई थी, लेकिन इसके बावजूद गोली चलाए जाने की घटना हुई। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला कानून-व्यवस्था, पुलिस जवाबदेही और मानवाधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को सामने लाता है। फिलहाल सभी की नजर जांच की प्रगति और अदालत में होने वाली आगे की कार्यवाही पर टिकी हुई है।