ऋषिकेश के बजरंग सेतु के ग्लास ब्रिज पर अब लगेगा ₹100 का टिकट, सुरक्षा के लिए नई SOP लागू

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ऋषिकेश , 29  जुलाई 2026 । उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित बजरंग सेतु (ग्लास ब्रिज) पर अब पर्यटकों को प्रवेश के लिए ₹100 का टिकट देना होगा। अब तक मुफ्त रहने वाले इस आकर्षण के लिए प्रशासन ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार की है। इसका उद्देश्य पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, भीड़ को नियंत्रित करना और पुल के संचालन को व्यवस्थित बनाना है।

ये शुल्क दो घंटे के लिए निर्धारित होगा। विभाग का कहना है कि बजरंग सेतु पर बने स्काईवॉक के देखरेख और साफ सफाई के लिए शुल्क लिया जा रहा है। जिससे इसकी देखरेख सही तरीके से किया जा सके। बताया गया है कि स्काईवॉक पर सुबह 6 से रात 10 बजे तक ही रास्ता खुला रहेगा। हालांकि बीच का रास्ता 24 घंटे खुला रहेगा।

69.20 करोड़ रुपये की लागत

कांवड़ यात्रा के दौरान कांच वाले हिस्से को पूरी तरह बंद रखा जाएगा। करीब 69.20 करोड़ रुपये की लागत से बने इस 132.30 मीटर लंबे पुल का निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ था। पांच परतों वाले टफेंड ग्लास से बने ग्लास स्काईवॉक की सुरक्षा और निगरानी को लेकर पहले से ही सतर्कता बरती जा रही है। बता दें कि बजरंग सेतु ऋषिकेश का नया और आधुनिक पुल है। इसे शहर के बढ़ते ट्रैफिक दबाव और पर्यटकों की सहूलियत के हिसाब से तैयार किया गया है।

नई SOP के अनुसार, ग्लास ब्रिज पर एक समय में सीमित संख्या में पर्यटकों को ही प्रवेश दिया जाएगा। टिकट प्रणाली लागू होने से भीड़ का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा और पुल पर अनावश्यक दबाव कम होगा। प्रशासन ने सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रवेश और निकास व्यवस्था, निगरानी तथा आपातकालीन प्रबंधन के लिए भी विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार किए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, पुल पर आने वाले पर्यटकों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। क्षमता से अधिक लोगों को एक साथ प्रवेश नहीं दिया जाएगा और सुरक्षा कर्मियों की निगरानी में ही पर्यटकों को पुल पर जाने की अनुमति मिलेगी। मौसम खराब होने या किसी तकनीकी कारण से आवश्यकता पड़ने पर पुल को अस्थायी रूप से बंद भी किया जा सकता है।

ऋषिकेश का बजरंग सेतु अपने पारदर्शी कांच के फर्श और गंगा नदी के मनमोहक दृश्य के कारण तेजी से लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन रहा है। नई टिकट व्यवस्था और SOP लागू होने से पर्यटकों की सुरक्षा के साथ-साथ इस पर्यटन स्थल के बेहतर प्रबंधन में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

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