चंडीगढ़, 23 जुलाई 2026 । पंजाब सरकार ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का दावा किया है। सरकार के अनुसार, ‘शिक्षा क्रांति’ के तहत शुरू किए गए नवाचार और स्टार्टअप कार्यक्रमों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। दावा किया गया है कि करीब 20 हजार छात्रों ने अपने स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्यमों के माध्यम से पहले ही वर्ष में लगभग 90 करोड़ रुपये की आय अर्जित की है।
शिक्षा मंत्री ने क्या कहा
इस उपलब्धि पर उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पंजाब का बिजनेस क्लास कार्यक्रम शिक्षा के उद्देश्य को नई परिभाषा दे रहा है। हमारा लक्ष्य केवल डिग्रियां देना नहीं, बल्कि नवाचार करने वाले, उद्यमी और रोजगार सृजित करने वाले युवाओं की नई पीढ़ी तैयार करना है। लगभग 95,000 विद्यार्थियों ने अपने व्यावसायिक विचारों पर काम किया। इनमें से 25,000 से अधिक ने अपने स्टार्टअप शुरू किए। पहले ही वर्ष में इन उद्यमों ने सामूहिक रूप से लगभग 90 करोड़ रुपये की कमाई की। इससे स्पष्ट है कि यदि युवाओं को सही अवसर मिलें तो वे सफल व्यवसाय खड़े कर सकते हैं, रोजगार पैदा कर सकते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
सरकार का कहना है कि स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ उद्यमिता, नवाचार, डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाइन थिंकिंग और व्यवसाय प्रबंधन की भी जानकारी दी जा रही है। इससे विद्यार्थियों को नौकरी तलाशने के बजाय स्वयं रोजगार सृजित करने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।
इस पहल के तहत छात्रों को स्टार्टअप आइडिया विकसित करने, मेंटरशिप, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और उद्योग जगत से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराए गए। कई छात्रों ने कृषि तकनीक, ई-कॉमर्स, हेल्थ टेक, शिक्षा, डिजिटल सेवाओं और स्थानीय जरूरतों पर आधारित स्टार्टअप शुरू किए, जिनसे उन्हें शुरुआती चरण में ही आर्थिक सफलता मिलने का दावा किया गया है।
राज्य सरकार का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार सृजक के रूप में तैयार करना भी है। इसी सोच के तहत स्कूलों और कॉलेजों में इनोवेशन एवं उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल भी विकसित कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की पहलें लगातार प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो इससे युवाओं में स्टार्टअप संस्कृति को मजबूती मिलेगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।