नालंदा/पटना, 11 जुलाई 2026 । बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार नीरज सिन्हा का नालंदा कनेक्शन और उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। चुनावी माहौल के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि नीरज सिन्हा कायस्थ समुदाय से हैं या नहीं। इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों और स्थानीय स्तर पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्रीय चुनाव समिति ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए अभिषेक कुमार सिन्हा का टिकट काटकर नालंदा के लाल नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा है। नीरज सिन्हा मूल रूप से नालंदा जिले के रहुई प्रखंड स्थित पतासंग गांव के रहने वाले हैं और कायस्थ समाज से ताल्लुक रखते हैं। इस युवा और अविवाहित चेहरे पर दांव लगाने से न सिर्फ पटना, बल्कि नालंदा के कार्यकर्ताओं में भी भारी उत्साह है। पार्टी ने संगठन के प्रति समर्पित जमीनी कार्यकर्ता को प्राथमिकता देकर एक बड़ा सियासी संदेश दिया है।
पारिवारिक विवाद के चलते हटाए गए अभिषेक
इससे पहले भाजपा ने अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ बंटी को उम्मीदवार बनाया था, जिन्होंने गुरुवार को अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया था। हालांकि, शुक्रवार को उन्होंने अचानक पारिवारिक कारणों का हवाला देकर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चारा घोटाले में उनके माता-पिता के नाम जुड़े होने के कारण भाजपा ने विवादों से बचने के लिए आखिरी समय में यह फैसला लिया।
कौन हैं भाजपा के नए प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा?
- वे नालंदा के रहुई प्रखंड के पतासंग गांव के रहने वाले नीरज कायस्थ समाज से ताल्लुक रखते हैं।
- नीरज सिन्हा की उम्र महज 32 वर्ष है और वे अविवाहित हैं, इनका परिवार बहुत पहले पटना में बस गया।
- वर्तमान में वे पटना महानगर इकाई के अंतर्गत नरेंद्र भारती मंडल के अध्यक्ष हैं।
- संगठन में लगातार सक्रिय रहने के कारण उनकी पहचान जमीनी कार्यकर्ता के रूप में है।
नीरज सिन्हा चुनाव प्रचार के दौरान विकास, संगठन और स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। वहीं विपक्षी दल भी इस सीट पर अपनी रणनीति के तहत विभिन्न सामाजिक वर्गों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव का मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है। युवा चेहरे को टिकट मिलने की खबर आते ही पतासंग गांव और नालंदा के भाजपा समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। बांकीपुर में इनका मुकाबला प्रशांत किशोर जैसे घाघ से होगा।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनाव का अंतिम परिणाम उम्मीदवारों के प्रचार, स्थानीय मुद्दों, मतदाताओं की प्राथमिकताओं और मतदान प्रतिशत जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।