नई दिल्ली, 07 जुलाई 2026 । गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को सरकारी आदेश के बाद हटाए जाने का मामला चर्चा में है। रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित आदेश जारी होने के बाद फिल्म का प्रदर्शन रोक दिया गया। इस फैसले के बाद फिल्म, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकारी हस्तक्षेप को लेकर बहस तेज हो गई है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने फिल्म ‘सतलुज’ को ZEE5 से हटाने का निर्देश दिया। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला सुरक्षा संबंधी चिंताओं और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) रूल, 2021 के तहत तय दायित्वों का हवाला देते हुए लिया गया।
एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, फिल्म निर्माताओं ने 2022 में ‘पंजाब 95’ टाइटल से CBFC से सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन किया था। हालांकि, सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए 127 कट स्वीकार नहीं किए गए, जिसके बाद फिल्म की रिलीज रोक दी गई।
अधिकारी ने कहा, “फिल्ममेकर्स ने सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए कट लागू नहीं किए और बाद में फिल्म का नाम बदलकर चुपचाप OTT पर रिलीज कर दिया। चूंकि OTT, CBFC के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, इसलिए मामला सरकार के संज्ञान में आने पर ZEE5 को फिल्म हटाने के लिए कहा गया।”
फिल्म हटाए जाने के पीछे के कारणों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। मामले में आधिकारिक पक्ष और संबंधित एजेंसियों की ओर से जारी निर्देशों पर सभी की नजर बनी हुई है। फिल्म से जुड़े कलाकारों और समर्थकों ने भी इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जबकि सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी फिल्म पर प्रतिबंध या प्रदर्शन रोकने जैसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया, नियामकीय प्रावधानों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। आने वाले दिनों में इस मामले में और स्पष्ट जानकारी सामने आने की संभावना है।