बिहार , 25 जून् 2026 । बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जगदीशपुर के तत्कालीन SDPO राजेश शर्मा का नाम सामने आने के बाद वे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। भरत तिवारी की मौत के मामले में दर्ज एफआईआर में राजेश शर्मा समेत कई पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान नियमों का पालन नहीं किया गया और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक बार फिर से चर्चा में आए जगदीशपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) राजेश कुमार शर्मा का विवादों से पुराना रिश्ता रहा है। वरीय अधिकारियों की कृपा से वो प्रमोशन पाते रहे और थानेदार से एसडीपीओ (डीएसपी) बन गए।) अब एक बार फिर से कई वर्षों बाद शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत तिवारी कथित एनकाउंटर का आरोप राजेश कुमार शर्मा के मत्थे पर आ गया, आखिरकार एक सप्ताह बाद उनका ट्रांसफर करना पड़ा।
राजेश शर्मा बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं और विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रह चुके हैं। हालांकि, उनका नाम पहली बार विवादों में नहीं आया है। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 19 वर्ष पहले मुजफ्फरपुर में हुए एक कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में भी उन पर आरोप लगे थे। उस मामले में तीन युवकों की मौत हुई थी और उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था।
भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद के बाद प्रशासन ने राजेश शर्मा को उनके पद से हटा दिया है और उनकी जगह दूसरे अधिकारी की तैनाती की गई है। यह कदम मामले की जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया बताया जा रहा है। भरत तिवारी मामले में पुलिस का दावा है कि कार्रवाई कानून के तहत की गई थी, जबकि परिजनों और कई सामाजिक संगठनों ने इसे संदिग्ध बताते हुए न्यायिक जांच की मांग की है। इस मामले ने बिहार में पुलिस कार्रवाई, एनकाउंटर की वैधता और जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है। पूर्व पुलिस अधिकारियों और विभिन्न संगठनों ने भी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। फिलहाल राजेश शर्मा के खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष किसी न्यायिक या जांच एजेंसी की रिपोर्ट से ही सामने आएगा। जांच जारी है और इसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।