नई दिल्ली, 25 जून् 2026 । आपातकाल की बरसी के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक “काला अध्याय” था। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल ने संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों को गंभीर रूप से प्रभावित किया था।
नवीन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय था, जिस दौरान ”संविधान की आत्मा को कुचलने” का प्रयास किया गया। भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ”12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अवैध घोषित किया था। इसके बाद राष्ट्रहित नहीं, बल्कि सत्ता हित को प्राथमिकता दी गई।” उन्होंने कहा, ”एक व्यक्ति की कुर्सी बचाने के लिए पूरे देश की स्वतंत्रता को बंधक बना लिया गया और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी द्वारा स्थापित संवैधानिक मूल्यों एवं लोकतांत्रिक मर्यादाओं को कुचलने का प्रयास किया गया।”
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि नई पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास और उससे मिले सबक के बारे में जानकारी हो। भाजपा नेता ने दावा किया कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता ही देश को आगे बढ़ाने का आधार है।
वहीं, आपातकाल को लेकर राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से वैचारिक मतभेद रहे हैं। भाजपा और उसके सहयोगी दल इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से समय-समय पर इस विषय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। आपातकाल का मुद्दा अक्सर राजनीतिक विमर्श और चुनावी बहस का हिस्सा बनता है।
आपातकाल की बरसी पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों, संगोष्ठियों और चर्चाओं का आयोजन किया गया, जहां लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आपातकाल आज भी भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु बना हुआ है।