राम मंदिर चंदा चोरी मामले में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने से मची हलचल,
अयोध्या, 22 जून् 2026 । उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। सरकार की ओर से गठित एसआईटी की अध्यक्षता लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। टीम के अन्य सदस्यों में आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।
राम मंदिर दान प्रकरण की प्रारंभिक रिपोर्ट को लेकर हलचल तेज है। अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सीलबंद लिफाफे में जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंपी। राम मंदिर में दान चोरी मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की ओर से मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की गई थी। इसके बाद शनिवार 13 जून को सीएम योगी ने तीन सदस्यीय कमिटी का गठन किया। कमिटी ने सोमवार 15 जून से मामले की जांच शुरू की। 20 जून को जांच के प्रारंभिक चरण को पूरा कर कमिटी लखनऊ लौटी। इसके बाद से लगातार कमिटी की रिपोर्ट को लेकर कयासों का दौर चल रहा था।
जानकारी के मुताबिक, श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में दिए गए चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद मामले की जांच SIT को सौंपी गई थी। जांच टीम ने वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की गहन पड़ताल की। प्रारंभिक रिपोर्ट में कथित अनियमितताओं और प्रक्रियागत खामियों से जुड़े कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।
सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान कई कर्मचारियों, अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की गई। टीम ने दान राशि के संग्रह, लेखा-जोखा और उसके उपयोग से जुड़े दस्तावेजों का भी परीक्षण किया। रिपोर्ट में कुछ मामलों में जवाबदेही तय करने की आवश्यकता बताई गई है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
सरकार को सौंपी गई इस प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विभाग आगे की कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी, लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इस मामले ने धार्मिक संस्थानों में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता की आवश्यकता पर भी चर्चा तेज कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में वित्तीय व्यवस्थाओं का पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह होना बेहद आवश्यक है।
फिलहाल सभी की नजर SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि विस्तृत जांच पूरी होने के बाद मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।