ट्रम्प की चेतावनी से भड़का ईरान, अमेरिका के साथ बातचीत रोकी; मध्य-पूर्व में फिर बढ़ा तनाव

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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन, 23 जून्‌ 2026 । अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत एक बार फिर संकट में पड़ती दिखाई दे रही है। ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हालिया चेतावनियों और सख्त बयानों पर नाराजगी जताते हुए वार्ता प्रक्रिया को रोकने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम ने मध्य-पूर्व की राजनीति और वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

स्विट्जरलैंड में 21 जून को ईरान और अमेरिका के बीच हुई बातचीत ट्रम्प की धमकी की वजह से खत्म हो गई। ईरानी वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा, “करीब 80 मिनट की बातचीत के बाद मुझे पता चला कि ट्रम्प ने हमारे राष्ट्रपति, हमारी वार्ता टीम और हमारे इलाके को लेकर धमकी भरे बयान दिए हैं।”

गालिबाफ ने कहा कि इसके बाद ईरानी डेलिगेशन ने बैठक खत्म कर दी और वहां से चला गया। उन्होंने बताया कि बाद में अमेरिकी पक्ष ने मध्यस्थों के जरिए एक और बैठक करने की इच्छा जताई, लेकिन ईरान ने इसे स्वीकार नहीं किया।

रिपोर्टों के अनुसार, ट्रम्प ने ईरान को समझौते की शर्तों का पालन करने और अमेरिकी अपेक्षाओं के अनुरूप कदम उठाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद तेहरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई और ईरानी अधिकारियों ने बातचीत की प्रक्रिया पर असंतोष जताया। ईरान का आरोप है कि दबाव और धमकियों के माहौल में सार्थक वार्ता संभव नहीं है।

ईरान का कहना है कि किसी भी समझौते के लिए आपसी सम्मान और समानता आवश्यक है। वहीं अमेरिकी पक्ष का दावा है कि वार्ता का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान निकालना है। हालांकि दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

विश्लेषकों का मानना है कि बातचीत रुकने से मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ सकता है और इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

हालांकि कुछ रिपोर्टों में यह भी संकेत मिले हैं कि पर्दे के पीछे संपर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं और मध्यस्थ देशों के जरिए संवाद बहाल करने की कोशिशें जारी हैं। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच मतभेद कम होते नहीं दिख रहे हैं।

फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि वार्ता दोबारा शुरू नहीं होती है तो क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सामने भी नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

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