नेतन्याहू का बड़ा बयान: ‘मैं ट्रम्प के इशारों पर काम नहीं करता

अमेरिका-इजराइल रिश्तों पर फिर छिड़ी बहस

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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन, 22 जून्‌ 2026 । इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को लेकर दिया गया एक बयान चर्चा का विषय बन गया है। नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी विदेशी नेता के इशारों पर काम नहीं करते और उनके सभी फैसले इजराइल के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। उनके इस बयान को अमेरिका और इजराइल के संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यरुशलम में आयोजित एक समिट में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा, “अमेरिका में लोग कहते हैं कि राष्ट्रपति ट्रम्प वही करते हैं जो मैं उनसे कहता हूं। वहीं इजराइल में कुछ लोग सोचते हैं कि मैं वही करता हूं जो ट्रम्प चाहते हैं। लेकिन दोनों ही बातें गलत हैं।”

इजराइली पीएम ने कहा कि इजराइल और अमेरिका करीबी सहयोगी जरूर हैं, लेकिन दोनों देशों के अपने-अपने हित हैं और हर मुद्दे पर उनकी राय एक जैसी नहीं होती।

नेतन्याहू ने दोहराया कि इजराइल, ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस पर कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जरूरत महसूस होगी तब तक इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान में रहेगी।

नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब मध्य पूर्व की स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीतियों को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हाल के दिनों में अमेरिकी प्रशासन और इजराइल के बीच विभिन्न मुद्दों पर समन्वय को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। इसी बीच नेतन्याहू ने अपनी सरकार की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि इजराइल एक संप्रभु राष्ट्र है और उसकी सरकार देश की सुरक्षा, नागरिकों के हितों तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के आधार पर फैसले लेती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका इजराइल का महत्वपूर्ण सहयोगी है, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा इजराइली नेतृत्व और उसकी सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ही लिया जाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर संदेश देने की कोशिश है। एक ओर नेतन्याहू अपने समर्थकों को यह दिखाना चाहते हैं कि उनकी सरकार स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम है, वहीं दूसरी ओर वह वैश्विक समुदाय को यह संकेत देना चाहते हैं कि इजराइल की नीतियां किसी बाहरी दबाव के आधार पर तय नहीं होतीं।

अमेरिका और इजराइल लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहे हैं। रक्षा, खुफिया सहयोग, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध हैं। हालांकि समय-समय पर विभिन्न सरकारों के बीच कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद भी सामने आते रहे हैं।

नेतन्याहू के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका-इजराइल संबंधों और मध्य पूर्व की कूटनीतिक गतिविधियों पर इस बयान के प्रभाव को लेकर और बहस देखने को मिल सकती है।

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