हरियाणा , 19 जून् 2026 । हरियाणा के बहुचर्चित पंचकूला नगर निगम फंड घोटाले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जांच एजेंसियों ने मामले में कथित अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के बीच वरिष्ठ IAS अधिकारी राम कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
क्या थी आईएएस अधिकारी की भूमिका
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के आरोपी अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके एमसी पंचकूला के कमिश्नर आईएएस राम कुमार सिंह ने बिचौलियों के जरिए बैंक अधिकारियों को कई साइन किए हुए चेक दिए। ये चेक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) खोलने के नाम पर दिए गए थे। इन चेकों का इस्तेमाल करके पैसे निकाल लिए गए और कोई एफडी नहीं बनाई गई। निकाली गई रकम को आरोपी बैंक अधिकारियों द्वारा कंट्रोल और ऑपरेट की जाने वाली शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) में भेज दिया गया।
जांच के अनुसार नगर निगम के फंड के उपयोग में गंभीर अनियमितताओं, वित्तीय नियमों के उल्लंघन और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के आरोपों की लंबे समय से जांच चल रही थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि उपलब्ध दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, घोटाले में करोड़ों रुपये के फंड के आवंटन और खर्च को लेकर सवाल उठाए गए थे। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले गए, जिनके आधार पर अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की गई। राम कुमार सिंह की गिरफ्तारी को इसी जांच का अहम कदम माना जा रहा है।
मामले में आगे और गिरफ्तारियों या पूछताछ की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित वित्तीय अनियमितताओं में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा सरकारी धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक वरिष्ठ IAS अधिकारी का नाम सामने आया है। प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और सरकारी फंड के उपयोग को लेकर यह प्रकरण हरियाणा में चर्चा का विषय बन गया है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घोटाले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।