हिसार, 28 मई 2026 । बिश्नोई समाज ने सामाजिक और जनसेवा के क्षेत्र में योगदान को सम्मान देते हुए बड़ा फैसला लिया है। समाज की ओर से हरियाणा के दिवंगत पूर्व विधायक को मरणोपरांत ‘बिश्नोई रत्न’ सम्मान देने की घोषणा की गई है। इस फैसले के बाद समाज और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा और समाज के प्रबुद्ध संतों की मौजूदगी में यह फैसला लिया गया। महासभा के पदाधिकारियों के अनुसार, पूर्व विधायक ने अपने जीवनकाल में बिश्नोई समाज के सिद्धांतों, पर्यावरण संरक्षण, जीव रक्षा और सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए अद्वितीय कार्य किए थे। उनके इसी निस्वार्थ योगदान और विरासत को सम्मान देने के लिए उन्हें मरणोपरांत इस गौरवशाली उपाधि से विभूषित किया जा रहा है।
समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अनुसार, पूर्व विधायक ने अपने राजनीतिक और सामाजिक जीवन में बिश्नोई समाज के उत्थान, पर्यावरण संरक्षण और जनहित के कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसी योगदान को देखते हुए उन्हें समाज के सर्वोच्च सम्मानों में से एक ‘बिश्नोई रत्न’ से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है।
बताया जा रहा है कि सम्मान समारोह में समाज के कई प्रमुख संत, सामाजिक प्रतिनिधि और राजनीतिक हस्तियां शामिल हो सकती हैं। कार्यक्रम के दौरान पूर्व विधायक के परिवार को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। समाज के लोगों का कहना है कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति को नहीं बल्कि उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों और मूल्यों को समर्पित है।
बिश्नोई समाज पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और सामाजिक सेवा के लिए देशभर में जाना जाता है। समाज का मानना है कि जिन लोगों ने इन मूल्यों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है, उन्हें सम्मानित करना नई पीढ़ी को प्रेरणा देने जैसा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस फैसले का सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर असर देखने को मिल सकता है। हरियाणा और राजस्थान सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में बिश्नोई समाज का प्रभाव माना जाता है।
पूर्व विधायक के समर्थकों और समाज के लोगों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि दिवंगत नेता ने हमेशा समाज और जनता की आवाज उठाई और उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।