हरियाणा में 1 जुलाई से फिर शुरू होगा SIR अभियान, 2 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के सत्यापन की तैयारी

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हरियाणा , 15 मई 2026 । हरियाणा में चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) एक बार फिर शुरू किया जा रहा है। राज्य में 1 जुलाई से इस अभियान के तहत करीब 2 करोड़ 6 लाख मतदाताओं के दस्तावेज और पहचान का सत्यापन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और संदिग्ध या फर्जी वोटर्स की पहचान करना है।

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि प्रदेश में करीब 25 लाख मतदाताओं को संदिग्ध श्रेणी में माना जा रहा है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तेज हो गया है कि क्या एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वोट कटेंगे। यही वजह है कि इस पूरे अभियान को हरियाणा का अब तक का सबसे बड़ा ‘वोटर ऑडिट’ माना जा रहा है। एसआईआर की टाइमिंग ने राजनीतिक माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया है।

चुनाव विभाग की ओर से बताया गया है कि अभियान के दौरान बूथ स्तर पर मतदाताओं की जानकारी का पुनः सत्यापन किया जाएगा। इसमें मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट नामों को हटाने के साथ-साथ नए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया भी की जाएगी।

अधिकारियों के मुताबिक विशेष टीमों और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को घर-घर जाकर जांच करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। मतदाताओं को पहचान और पते से जुड़े आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। जिन मामलों में जानकारी संदिग्ध मिलेगी, वहां अतिरिक्त जांच भी की जा सकती है।

राज्य में चुनावी पारदर्शिता को लेकर यह अभियान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि सही और अपडेटेड मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद होती है। इसलिए किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े को रोकने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है।

राजनीतिक दल भी इस अभियान पर नजर बनाए हुए हैं। कई दलों ने पहले भी मतदाता सूची में गड़बड़ी और डुप्लीकेट एंट्री को लेकर सवाल उठाए थे। ऐसे में SIR अभियान को आगामी चुनावों से पहले अहम कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर मतदाता सत्यापन अभियान से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ सकती है, लेकिन यह भी जरूरी होगा कि पात्र मतदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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