हरियाणा, 11 अप्रैल 2026 । हरियाणा में गेहूं खरीद सीजन के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला, जब उन्होंने खुद मंडी पहुंचकर गेहूं की नमी की जांच की। इस कदम ने न केवल प्रशासनिक तंत्र को सतर्क किया, बल्कि किसानों के बीच भी भरोसा बढ़ाया कि सरकार उनकी फसल का एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने मंडी में मौजूद किसानों और व्यापारियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुने। किसानों ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस बार गेहूं की आवक अच्छी हो रही है और सरकार द्वारा की जा रही खरीद प्रक्रिया से उन्हें राहत मिल रही है। मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार का प्रयास है कि किसानों की फसल समय पर और पूरी पारदर्शिता के साथ खरीदी जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसी भी किसान को नमी या अन्य तकनीकी कारणों के चलते अनावश्यक परेशानी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गेहूं खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए। मंडियों में अक्सर नमी के नाम पर किसानों की फसल को रिजेक्ट करने या देरी करने की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिन्हें खत्म करने के लिए अब सख्त निगरानी रखी जा रही है।
इस दौरान उन्होंने मंडी में मौजूद किसानों से सीधे संवाद भी किया और उनकी समस्याएं सुनीं। किसानों ने बताया कि पहले नमी की जांच में मनमानी होती थी, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता था। इस पर मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि अब किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
सरकार का यह कदम खासतौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गेहूं हरियाणा की प्रमुख फसलों में से एक है और लाखों किसानों की आय इससे जुड़ी हुई है। यदि खरीद प्रक्रिया सुचारु और पारदर्शी रहती है, तो किसानों को समय पर भुगतान और उचित मूल्य मिल सकेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जमीनी निगरानी और सीधे हस्तक्षेप से न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि कृषि व्यवस्था में भरोसा भी बढ़ेगा। यह पहल किसानों के हितों की रक्षा करने और उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।