नई दिल्ली, 31 मार्च 2026 । 1 अप्रैल से देशभर में Census 2027 की प्रक्रिया का औपचारिक आगाज़ होने जा रहा है। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास होगी, क्योंकि इसे पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संपन्न किया जाएगा। जनगणना आयुक्त Mrityunjay Kumar ने जानकारी दी है कि यह भारत की पहली ऐसी जनगणना होगी जिसमें कागज की जगह मोबाइल ऐप और ऑनलाइन सिस्टम का व्यापक उपयोग किया जाएगा।
1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा पहला चरण
आयुक्त के अनुसार, शुरुआती चरण में घरों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। वहीं, जातिगत आंकड़ों का संग्रह दूसरे चरण में किया जाएगा, जिसमें आबादी से जुड़ी विस्तृत जानकारी शामिल होगी। जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू किया जाएगा। इस दौरान नागरिकों से लगभग 33 सवालों के जवाब मांगे जाएंगे।
डिजिटल जनगणना के तहत गणनाकार (Enumerators) को विशेष मोबाइल एप्लिकेशन उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें वे घर-घर जाकर डेटा सीधे अपलोड करेंगे। इसके अलावा, नागरिकों को भी स्वयं-गणना (Self Enumeration) का विकल्प मिलेगा, जहां वे ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी खुद भर सकेंगे। इससे प्रक्रिया तेज होने के साथ-साथ डेटा की सटीकता भी बढ़ेगी।
इस नई प्रणाली में रियल-टाइम डेटा अपडेट, ऑटोमैटिक एरर चेकिंग और जियो-टैगिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे डुप्लिकेट एंट्री या गलत जानकारी की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। साथ ही, डेटा की सुरक्षा के लिए उन्नत साइबर सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाएंगे।
आयुक्त के अनुसार, डिजिटल जनगणना से न केवल समय और लागत की बचत होगी, बल्कि सरकार को योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन के लिए अधिक सटीक और ताजा आंकड़े भी मिल सकेंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण के साथ गणनाकारों को तैयार किया जा रहा है, ताकि वे तकनीक का सही उपयोग कर सकें।
सरकार का मानना है कि Census 2027 भारत के डेटा इकोसिस्टम को नई दिशा देगा और नीति निर्माण में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। यह पहल देश को डिजिटल गवर्नेंस के नए स्तर तक ले जाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।