पटना , 30 मार्च 2026 । बिहार की सियासत में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। Nitish Kumar ने अपने एमएलसी (विधान परिषद सदस्य) पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस फैसले को राज्य की राजनीति में संभावित बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
75 वर्षीय जेडीयू (JDU) प्रमुख ने 5 मार्च को ही एक भावुक संदेश के जरिए अपने इस फैसले का संकेत दे दिया था। उन्होंने अपनी इच्छा जताई थी कि वह बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के सदनों का भी हिस्सा बनना चाहते थे। नीतीश कुमार ने ‘विकसित बिहार’ के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और नई सरकार को अपना “सहयोग और मार्गदर्शन” देने का वादा किया।
सूत्रों के मुताबिक, उनके इस्तीफे के पीछे राजनीतिक रणनीति और आगामी समीकरणों को साधने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस्तीफे के कारणों को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
नीतीश कुमार लंबे समय से Bihar की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे हैं और उनके हर फैसले का राज्य की सत्ता पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में उनके इस कदम ने गठबंधन की राजनीति, सत्ता संतुलन और आने वाले चुनावों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा किसी बड़े राजनीतिक फेरबदल की भूमिका हो सकता है—चाहे वह नई रणनीति हो, गठबंधन में बदलाव या फिर सत्ता समीकरणों का पुनर्गठन।
विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाए हैं, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इसे एक सोची-समझी रणनीति बता रहा है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति किस दिशा में जाती है और आगे क्या बड़े कदम सामने आते हैं।