पटना, 27 मार्च 2026 । बिहार की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है, जहां तेजस्वी यादव के खिलाफ फर्जी वीडियो शेयर करने के आरोप में FIR दर्ज करने की अर्जी दी गई है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के सलाहकार और ‘हम’ के नेता दानिश रिजवान ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। दानिश का आरोप है कि उनके पुराने एक वीडियो को आधुनिक तकनीक (AI) से छेड़छाड़ कर सोशल मीडिया पर फैलाया गया है। इस संबंध में उन्होंने भोजपुर साइबर थाने को ई-मेल के जरिए शिकायती आवेदन भेजकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच शुरू कर दी है, जिससे सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर साझा किया गया वीडियो भ्रामक और तथ्यों से परे है, जिससे जनता के बीच गलत संदेश फैल सकता है। शिकायतकर्ता ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है और संबंधित एजेंसियों से जांच की अपील की है।
इस मामले ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जिम्मेदार सोशल मीडिया उपयोग के बीच संतुलन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई सामग्री जानबूझकर भ्रामक तरीके से साझा की जाती है, तो यह आईटी कानून और आपराधिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई के दायरे में आ सकती है।
वहीं, राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस मुद्दे ने सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच टकराव को और बढ़ा दिया है। विपक्ष इस मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता सकता है, जबकि दूसरी ओर शिकायतकर्ता इसे कानून और व्यवस्था का मुद्दा मान रहा है।
अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और जांच पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि FIR दर्ज होती है, तो यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बड़ा रूप ले सकता है।